Delhi: दिल्ली की एक अदालत ने Manoj Kesarichand Sandesara और उनके परिवार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को जारी रखते हुए कहा है कि इंटरनेट पर मौजूद उन लेखों और वीडियो को हटाया जाए, जिनमें परिवार को Sterling
Delhi: दिल्ली की एक अदालत ने Manoj Kesarichand Sandesara और उनके परिवार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को जारी रखते हुए कहा है कि इंटरनेट पर मौजूद उन लेखों और वीडियो को हटाया जाए, जिनमें परिवार को Sterling Biotech बैंक धोखाधड़ी से जोड़ा गया था। यह फैसला उन लोगों के लिए जरूरी है जो अपनी ऑनलाइन छवि को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया और क्यों
Tis Hazari कोर्ट की सीनियर सिविल जज Richa Sharma ने कहा कि Manoj Kesarichand Sandesara अपमानजनक खबरों को हटाने के हकदार हैं। कोर्ट ने माना कि अगर इन लेखों को नहीं हटाया गया, तो उनकी सार्वजनिक छवि को अपूरणीय क्षति होगी। अदालत ने Google और Meta जैसी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसी सामग्री को डी-इंडेक्स करें और हटाएं।
कौन से शब्दों को माना गया अपमानजनक
अदालत ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द किए जाने के बाद कुछ शब्दों का इस्तेमाल करना गलत है। कोर्ट ने इन शब्दों को प्राथमिक तौर पर मानहानि माना है:
- भगोड़ा (Fugitives)
- बैंक धोखाधड़ी (Bank Fraud)
- पब्लिक मनी की हेराफेरी (Siphoning public money)
- बैंकों को धोखा देना (Defrauded banks)
- मनी लॉन्ड्रिंग (Money laundering)
मीडिया और पत्रकारों के लिए कोर्ट की चेतावनी
अदालत ने मीडिया घरानों और पत्रकारों को बिना जांच-परख के खबरें न छापने की सलाह दी है। कोर्ट के मुताबिक, ऐसी रिपोर्टिंग जो केवल किसी की छवि खराब करने के लिए हो, वह संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंधों के दायरे में आती है। हालांकि, यह आदेश केवल मानहानि वाली सामग्री पर लागू है, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की रिपोर्टिंग पर कोई रोक नहीं है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Sandesara परिवार को कोर्ट से क्या राहत मिली है?
दिल्ली कोर्ट ने आदेश दिया है कि Google और Meta जैसे प्लेटफॉर्म्स उन लेखों और वीडियो को हटाएं जो Sandesara परिवार को Sterling Biotech बैंक धोखाधड़ी से जोड़ते हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या स्टैंड रहा है?
नवंबर और दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 5,100 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान के समझौते को स्वीकार किया और प्रमोटरों के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द करने का आदेश दिया था।