Delhi: दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ में करीब 37 करोड़ रुपये की हेराफेरी के आरोप में तीन कोचिंग सेंटरों के मालिकों और न
Delhi: दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ में करीब 37 करोड़ रुपये की हेराफेरी के आरोप में तीन कोचिंग सेंटरों के मालिकों और निदेशकों समेत कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन लोगों पर छात्रों के फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकार से पैसे हड़पने का आरोप है।
कैसे हुआ यह घोटाला और क्या थे नियम
यह योजना 2017 में SC, ST, OBC और EWS वर्ग के होनहार छात्रों को मुफ्त कोचिंग और 2,500 रुपये वजीफा देने के लिए शुरू की गई थी। जांच में पता चला कि 2018 से 2021 के बीच कई संस्थानों ने फर्जी छात्रों की लिस्ट बनाई और सरकारी फंड लिया। कई छात्रों के नाम एक से ज्यादा कोचिंग सेंटरों में दर्ज थे। साथ ही, नियमों के खिलाफ जाकर फंड के लिए अलग बैंक खाते नहीं खोले गए और छात्रों को वजीफा भी नहीं मिला।
कौन-कौन हुए गिरफ्तार और अब क्या स्थिति है
ACB ने 29 अप्रैल 2026 को ये गिरफ्तारियां कीं, जिनमें रविंद्र सिंह जादोन, नरेंद्र कुमार गुप्ता, शंभू शरण और कुंवर दिग्विजय सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इन आरोपियों को 30 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। एसीबी प्रमुख विक्रमजीत सिंह ने बताया कि विभाग ने फंड जारी करने से पहले भौतिक सत्यापन नहीं किया, जिसका फायदा इन संस्थानों ने उठाया।
घोटाले में शामिल मुख्य संस्थान और लोग
| नाम |
संबंधित संस्थान/पद |
| रविंद्र सिंह जादोन |
रविंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन सिविल सर्विसेज |
| नरेंद्र कुमार गुप्ता |
तक्षशिला अकादमी (प्राइवेट) लिमिटेड |
| शंभू शरण, संजय और जीतेंद्र |
किरण इंस्टीट्यूट ऑफ करियर अचीवमेंट |
| कुंवर दिग्विजय सिंह |
परिणाम कोचिंग इंस्टीट्यूट/पहल एनजीओ |
| हर्षित |
मोमेंटम नीट आईआईटी अकादमी |
| संजीव और आजाद कालेत |
गैर-सूचीबद्ध संस्थान |
Frequently Asked Questions (FAQs)
जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना क्या थी?
यह योजना 2017 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद SC, ST, OBC और EWS वर्ग के मेधावी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग और 2,500 रुपये का मासिक वजीफा देना था।
इस घोटाले में मुख्य गड़बड़ी क्या पाई गई?
संस्थानों ने फर्जी छात्रों के दस्तावेज बनाए, एक ही छात्र का नाम कई सेंटरों में दर्ज किया और सरकारी फंड हड़प लिया, जबकि छात्रों को वजीफा नहीं दिया गया।