Delhi: दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने ‘Mission Yamuna’ के तहत 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। इस पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से Najafgarh Drain की सफाई, सीवेज ट्रीटमें
Delhi: दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने ‘Mission Yamuna’ के तहत 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। इस पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से Najafgarh Drain की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम को सुधारने और शहर में पानी के बेहतर मैनेजमेंट के लिए किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि यमुना नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोका जाए और नदी को साफ किया जाए।
Najafgarh Drain के लिए क्या योजना है
दिल्ली सरकार ने Najafgarh इलाके में 12 नए Decentralised Sewage Treatment Plants (DSTPs) लगाने का काम शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 860 करोड़ रुपये है। यह काम केंद्र सरकार की AMRUT स्कीम के तहत किया जा रहा है। इन प्लांट्स के बनने से बाहरी दिल्ली की 120 अनधिकृत कॉलोनियों और 27 गांवों में साफ-सफाई बेहतर होगी और मानसून के दौरान जलभराव की समस्या भी कम होगी।
सीवेज ट्रीटमेंट और अन्य सुधारों की जानकारी
यमुना को साफ करने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) पहले से ही 27 प्लांट्स चला रहा है, जिनमें से 18 को अपग्रेड किया जा रहा है। इसके अलावा, Keshopur प्लांट की क्षमता 12 MGD से बढ़ाकर 18 MGD करने के लिए 122 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने 2028 तक शहर की ट्रीटमेंट क्षमता को 1,500 MGD तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
प्रदूषण रोकने के लिए और क्या कदम उठाए गए
CM Rekha Gupta ने हवा की सफाई के लिए ‘Made in India’ एयर प्यूरीफायर और एंटी-स्मॉग गन का भी निरीक्षण किया। ये मशीनें कीर्ति नगर और मायापुरी जैसे इलाकों में लगाई गई हैं। साथ ही, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग को यमुना किनारे पक्के घाट बनाने और बायो-माइनिंग के लिए जमीन तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। DPCC और CPCB हर महीने 47 हॉटस्पॉट्स पर पानी की जांच कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Najafgarh Drain की सफाई के लिए कितने पैसे खर्च होंगे
Najafgarh इलाके में 12 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (DSTPs) लगाने के लिए लगभग 860 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें निर्माण और 15 साल का रखरखाव शामिल है।
Mission Yamuna का मुख्य लक्ष्य क्या है
इसका लक्ष्य यमुना में गिरने वाले बिना ट्रीटमेंट वाले सीवेज को पूरी तरह रोकना और 2028 तक ट्रीटमेंट क्षमता को 1,500 MGD तक पहुँचाना है।