Delhi में मासूमों की तस्करी का बड़ा खुलासा, लड़कों की कीमत 10 लाख और लड़कियों की आधी; कई राज्यों में फैला था जाल

Delhi: दिल्ली पुलिस ने बच्चों की तस्करी करने वाले दो बड़े गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। इन गिरोहों ने मासूम बच्चों को बेचने का एक खौफनाक कारोबार शुरू कर रखा था। पुलिस ने इस कार्रवाई में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और

Delhi: दिल्ली पुलिस ने बच्चों की तस्करी करने वाले दो बड़े गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। इन गिरोहों ने मासूम बच्चों को बेचने का एक खौफनाक कारोबार शुरू कर रखा था। पुलिस ने इस कार्रवाई में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और कई नवजात शिशुओं को बचाया है। यह पूरा खेल गरीब परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर चलाया जा रहा था।

दिल्ली पुलिस की रेलवे यूनिट ने 20 जून 2026 को एक गिरोह को पकड़ा, जिसने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से डेढ़ साल के बच्चे कार्तिक को अगवा किया था। पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया है और इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि यह गिरोह गरीब परिवारों से बच्चों को सिर्फ 8 से 10 हजार रुपये में खरीदता था या उन्हें चुराता था। इसके बाद इन बच्चों को 8 से 10 लाख रुपये में बेच दिया जाता था। लड़कों की कीमत ज्यादा थी, जबकि लड़कियों को आधे दाम यानी 5-6 लाख रुपये में बेचा जाता था। एक नवजात लड़के को 18 लाख रुपये में बेचने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने करीब 300 CCTV फुटेज खंगाले और अलग-अलग राज्यों में छापेमारी की।

इसी बीच दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट यूनिट ने भी एक अंतर-राज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह का जाल दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक फैला था। पुलिस ने इस ऑपरेशन में 12 से 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य सरगना सायबाभाई घामर उर्फ कालिया और एक निजी अस्पताल की मालिक डॉ. विवेकी भी शामिल हैं। यह अस्पताल बच्चों को अवैध रूप से गोद लेने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने में मदद करता था।

तस्करी का विवरण खरीद मूल्य बिक्री मूल्य
लड़के (सेंट्रल यूनिट मामला) 2 लाख रुपये तक 6-8 लाख रुपये
लड़कियां (सेंट्रल यूनिट मामला) 1 लाख रुपये 3-4 लाख रुपये
लड़के (रेलवे यूनिट मामला) 8-10 हजार रुपये 8-10 लाख रुपये
लड़कियां (रेलवे यूनिट मामला) 8-10 हजार रुपये 5-6 लाख रुपये

इस सिंडिकेट ने पिछले डेढ़ साल में करीब 30 बच्चों की तस्करी की है। पुलिस ने हरियाणा के पानीपत और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में तीन निःसंतान दंपतियों से 4 शिशुओं को बचाया। विशेष पुलिस आयुक्त देवेश चंद्र श्रीवास्तव और पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि यह गिरोह फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड और जन्म प्रमाण पत्र बनाकर बच्चों को अवैध तरीके से ट्रांसफर करता था। पकड़े गए आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अन्य कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है।