Delhi में स्कॉटिश म्यूजिकल ‘Lifeline’ का प्रीमियर, दवाइयों के असर कम होने के खतरे पर लोगों को किया जागरूक

Delhi: नई दिल्ली में ब्रिटिश हाई कमीशन ने स्कॉटिश म्यूजिकल ‘Lifeline’ का इंडिया प्रीमियर आयोजित किया। इस कार्यक्रम का मकसद लोगों को एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी दवाइयों के प्रति बढ़ते प्रतिरोध के खतर

Delhi: नई दिल्ली में ब्रिटिश हाई कमीशन ने स्कॉटिश म्यूजिकल ‘Lifeline’ का इंडिया प्रीमियर आयोजित किया। इस कार्यक्रम का मकसद लोगों को एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी दवाइयों के प्रति बढ़ते प्रतिरोध के खतरे के बारे में बताना था। इस पहल के जरिए भारत और ब्रिटेन के बीच तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इस साझेदारी के तहत ड्रग-रेसिस्टेंट इन्फेक्शन से लड़ने के लिए रिसर्च, लैब को मजबूत बनाने और निगरानी के लिए करोड़ों रुपये की फंडिंग दी जा रही है। ‘Lifeline’ म्यूजिकल में असली स्वास्थ्य कर्मियों और वैज्ञानिकों ने प्रोफेशनल कलाकारों के साथ परफॉर्म किया। इस नाटक के जरिए यह समझाने की कोशिश की गई कि कैसे एंटीबायोटिक प्रदूषण और दवाओं का गलत इस्तेमाल एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम बन गया है।

ब्रिटिश हाई कमीशन की मिनिस्टर काउंसलर सारा कूपर ने बताया कि दवा-प्रतिरोधी संक्रमण दोनों देशों और पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर खतरा हैं। वहीं, प्रोफेसर डेम सैली डेविस ने कहा कि इस समस्या से लड़ने के लिए केवल विज्ञान या राजनीतिक इच्छाशक्ति काफी नहीं है, बल्कि हम सबको मिलकर अपनी आदतों और मूल्यों को बदलना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस म्यूजिकल ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में परफॉर्म कर इतिहास रचा था, जहाँ इसके गीतों ने राजनयिकों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा।

भारत और ब्रिटेन के बीच स्वास्थ्य और बायोटेक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इस दिशा में मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

पहल/फंड विवरण/राशि
UK Research and Innovation विभिन्न रिसर्च प्रोग्राम में 10 मिलियन पाउंड से ज्यादा का निवेश
Fleming Fund भारत में लैब मजबूती और निगरानी के लिए लगभग 6 लाख पाउंड का निवेश
Gamrif और C-CAMP पर्यावरण में AMR से निपटने के लिए 5.1 मिलियन पाउंड तक की मदद
Lifeline टूर 2027 में भारत के कई शहरों में इस म्यूजिकल का प्रदर्शन होगा

इस पूरी योजना का हिस्सा UK-India विजन 2035 और रोडमैप 2030 है। इसके अलावा, जुलाई 2024 में लॉन्च हुई टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनिशिएटिव (TSI) के तहत भी हेल्थ-टेक और बायोटेक पर जोर दिया जा रहा है। भारत और ब्रिटेन के बीच AI और नई तकनीकों पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए व्यापार समझौतों पर भी चर्चा हुई है।