Delhi : प्रदूषण और भीड़भाड़ वाली राजधानी दिल्ली से पर्यावरण को लेकर दो अच्छी खबरें आई हैं। शहर में तितलियों की प्रजातियों की संख्या बढ़ी है और असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में एक ऐसी झील मिली है जिसका पानी बेहद साफ है। ये
Delhi : प्रदूषण और भीड़भाड़ वाली राजधानी दिल्ली से पर्यावरण को लेकर दो अच्छी खबरें आई हैं। शहर में तितलियों की प्रजातियों की संख्या बढ़ी है और असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में एक ऐसी झील मिली है जिसका पानी बेहद साफ है। ये दोनों बदलाव दिल्ली के पर्यावरण के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
नीली झील का पानी कितना साफ है और क्या है खास
असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य की नीली झील का पानी सभी तय मानकों पर खरा उतरा है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने यहाँ पानी के नमूनों की जांच की, जिसमें जल गुणवत्ता सूचकांक 15-19 पाया गया, जिसे बेहतरीन स्तर माना जाता है। इस झील का पीएच मान 5.5-8.6 के बीच है और इसमें भारी धातुओं की मात्रा बहुत कम है। दिल्ली सरकार अब इस नीली झील को राजधानी की पहली रामसर साइट बनाने की तैयारी कर रही है।
दिल्ली में तितलियों की संख्या क्यों बढ़ी
राजधानी में तितलियों की प्रजातियों में इजाफा हुआ है। साल 2024 में यहाँ 68 प्रजातियां थीं, जो 2025 में बढ़कर 70 हो गई हैं। वाइल्डटेल्स फाउंडेशन के सोहेल मदान के मुताबिक इसका कारण आकस्मिक प्रवास है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों से आने वाले फल, सब्जी और पौधों के साथ तितलियों के अंडे दिल्ली पहुँच जाते हैं और यहाँ विकसित होकर तितलियाँ बन जाते हैं। इनमें कॉमन सेखलियन और कॉमन जे जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली की कौन सी झील सबसे साफ पाई गई है
असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य की नीली झील का पानी सबसे साफ पाया गया है, जिसका जल गुणवत्ता सूचकांक 15-19 है और इसे रामसर साइट बनाने की योजना है।
दिल्ली में तितलियों की संख्या बढ़ने का क्या कारण है
हिमालयी राज्यों जैसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से आने वाले पौधों और सब्जियों के साथ तितलियों के अंडे दिल्ली आते हैं, जो यहाँ विकसित होकर संख्या बढ़ा रहे हैं।