Delhi: राजधानी दिल्ली के भलस्वा डंपसाइट (Bhalswa Dumpsite) को कचरा मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री Manohar Lal ने गुरुवार को साइट का दौरा किया और वहां चल रहे बायोमा
Delhi: राजधानी दिल्ली के भलस्वा डंपसाइट (Bhalswa Dumpsite) को कचरा मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री Manohar Lal ने गुरुवार को साइट का दौरा किया और वहां चल रहे बायोमाइनिंग के काम की समीक्षा की। सरकार का लक्ष्य इस इलाके को जल्द से जल्द साफ कर प्रदूषण कम करना और जमीन को आम लोगों के इस्तेमाल के लायक बनाना है।
भलस्वा डंपसाइट की वर्तमान स्थिति क्या है?
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 26 मई 2026 तक यहाँ लगभग 23.17 लाख मीट्रिक टन कचरा बचा है। कुल 70 एकड़ के क्षेत्र में से करीब 43 एकड़ जमीन को अब तक साफ किया जा चुका है। कचरा हटाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है और रोजाना करीब 15,000 मीट्रिक टन कचरे की प्रोसेसिंग की जा रही है। काम की निगरानी के लिए हर दिन ड्रोन सर्वे किया जा रहा है।
कब तक पूरी तरह साफ होगा यह इलाका?
केंद्रीय मंत्री Manohar Lal ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सितंबर 2026 तक इस लैंडफिल साइट का पूरा उपचार पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2026 तक यह जगह पूरी तरह साफ हो जानी चाहिए। वहीं, दिल्ली के मेयर Pravesh Wahi और शहरी विकास मंत्री Ashish Sood ने भी साल 2026 के अंत तक भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट्स को पूरी तरह साफ करने का लक्ष्य रखा है।
आगे की योजना और नियम क्या हैं?
मंत्री ने साफ कहा है कि अब जो नया कचरा हर दिन पैदा हो रहा है, उसे तुरंत प्रोसेस किया जाए ताकि दोबारा कचरे का ढेर न लगे। कचरा साफ होने के बाद जो जमीन खाली होगी, उसका इस्तेमाल जनता की भलाई और सामुदायिक कार्यों के लिए किया जाएगा। इस पूरे काम के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि दिल्ली के लोगों को प्रदूषण मुक्त वातावरण मिल सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
भलस्वा डंपसाइट पर अब कितना कचरा बचा है?
26 मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ अब लगभग 23.17 लाख मीट्रिक टन कचरा बचा है, जिसे हटाने का काम जारी है।
कचरा हटाने का काम कब तक पूरा होगा?
केंद्रीय मंत्री Manohar Lal ने इसे सितंबर 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है, जबकि मेयर और अन्य मंत्रियों का लक्ष्य साल 2026 के अंत तक इसे पूरी तरह साफ करना है।