Delhi: राजधानी दिल्ली के लोधी रोड के पास से गुजरने वाले लोग अक्सर आर्कबिशप मकारियोस मार्ग देखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस सड़क का नाम एक खास इतिहास से जुड़ा है। यह सड़क भारत और साइप्रस के बीच की गहरी दोस्ती
Delhi: राजधानी दिल्ली के लोधी रोड के पास से गुजरने वाले लोग अक्सर आर्कबिशप मकारियोस मार्ग देखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस सड़क का नाम एक खास इतिहास से जुड़ा है। यह सड़क भारत और साइप्रस के बीच की गहरी दोस्ती और गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की याद दिलाती है। हाल ही में इस मार्ग के ऐतिहासिक महत्व को लेकर चर्चा फिर से शुरू हुई है।
इस सड़क का नाम कैसे पड़ा और क्या है इतिहास
इस सड़क का नाम पहले गोल्फ लिंक्स रोड था। 1983 में नई दिल्ली में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का शिखर सम्मेलन हुआ था, जिसके बाद 1980 के दशक की शुरुआत में इसका नाम बदलकर आर्कबिशप मकारियोस मार्ग कर दिया गया। उस समय भारत ने फिदेल कास्त्रो और यासर अराफात जैसे बड़े नेताओं की मेजबानी की थी और इसी कड़ी में NAM की प्रमुख हस्तियों को सम्मान देने के लिए यह नामकरण किया गया था।
कौन थे आर्कबिशप मकारियोस तृतीय
आर्कबिशप मकारियोस तृतीय साइप्रस के पहले राष्ट्रपति और वहां के चर्च के आर्कबिशप थे। उन्होंने साइप्रस को ब्रिटिश शासन से आजादी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। वह उपनिवेशवाद के सख्त खिलाफ थे और कई बार भारत आए थे। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी उन्हें बहुत सम्मान देते थे।
भारत और साइप्रस के रिश्तों में नया मोड़
भारत और साइप्रस के बीच संबंध हमेशा से मजबूत रहे हैं। हाल के समय में भी कई बड़े घटनाक्रम हुए हैं:
| तारीख/समय |
मुख्य घटना |
| जून 2025 |
PM नरेंद्र मोदी को साइप्रस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ मकारियोस तृतीय’ मिला |
| 16 जून 2025 |
दोनों देशों के बीच व्यापक साझेदारी के लिए संयुक्त घोषणा जारी हुई |
| अक्टूबर 2025 |
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों देशों को विश्वसनीय मित्र और भरोसेमंद भागीदार बताया |
इन दोनों देशों के बीच रक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।