Delhi: दिल्ली में All India Railway Federation (AIRF) ने देशभर के रेलवे ट्रैकमेन के लिए एक नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस बैठक का मुख्य मकसद उन 2.5 लाख कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई पर चर्चा करना था जो रेलवे लाइनों पर क
Delhi: दिल्ली में All India Railway Federation (AIRF) ने देशभर के रेलवे ट्रैकमेन के लिए एक नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस बैठक का मुख्य मकसद उन 2.5 लाख कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई पर चर्चा करना था जो रेलवे लाइनों पर काम करते हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और ट्रैकवर्कर्स के लिए बड़े बदलावों का ऐलान किया।
ट्रैकमेन की सुरक्षा के लिए क्या नए बदलाव होंगे?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अगले 5 से 8 साल के भीतर रेलवे सुरक्षा और ट्रैक मेंटेनेंस के पुराने तरीकों को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। अब सौ साल पुराने तरीकों की जगह नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। सरकार का लक्ष्य है कि भारत में ट्रैक वर्कर्स की सुरक्षा विकसित देशों के स्तर से भी बेहतर हो।
सुरक्षा के लिए कौन सी नई तकनीक आएगी?
कर्मचारियों की जान बचाने के लिए अब कई आधुनिक कदम उठाए जा रहे हैं:
- सेफ्टी ऐप: एक मोबाइल ऐप का ट्रायल Southern और Western Railways में चल रहा है, जो पुराने VHF ‘रक्षक’ सिस्टम की जगह लेगा।
- मशीनों की संख्या: ट्रैक मशीनों की संख्या 1,800 से बढ़ाकर 3,000 की जाएगी ताकि मैनुअल चेकिंग कम हो सके।
- नई गाड़ियां: रेल-कम-रोड गाड़ियां लाई जा रही हैं जिससे स्टाफ को औजारों के साथ ट्रैक पर चलने में आसानी होगी और पैदल चलने की जरूरत कम होगी।
AIRF और रेल मंत्रालय ने क्या कहा?
AIRF के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने ट्रैकमेन को भारतीय रेलवे की ‘लाइफलाइन’ बताया। उन्होंने कहा कि 60,000 किलोमीटर से ज्यादा ट्रैक की देखरेख करने वाले ये कर्मचारी बहुत जोखिम भरे काम करते हैं। वहीं, रेल मंत्री ने जानकारी दी कि पिछले 10 सालों में रेल हादसे 90% कम हुए हैं, लेकिन लाइव लाइन पर काम करने वाले स्टाफ की सुरक्षा अभी भी एक बड़ी चुनौती है जिसे तकनीक से हल किया जाएगा।