Delhi: दिल्ली के AIIMS अस्पताल में रीढ़ की हड्डी की गंभीर विकृति (Spine Deformities) से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। यहां के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर भवुक गर्ग ने सर्जरी की एक ऐसी तकनीक विकसित की है,
Delhi: दिल्ली के AIIMS अस्पताल में रीढ़ की हड्डी की गंभीर विकृति (Spine Deformities) से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। यहां के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर भवुक गर्ग ने सर्जरी की एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे अब बेहद जटिल मामलों का इलाज संभव हो सकेगा। इस नई पद्धति से उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी जिनकी रीढ़ की हड्डी बहुत ज्यादा मुड़ चुकी है या जिसमें गंभीर खराबी है।
यह नई सर्जरी तकनीक कैसे काम करती है?
प्रोफेसर भवुक गर्ग ने PVCR (Posterior Vertebral Column Resection) के पुराने तरीके में बदलाव किया है। इस नई तकनीक में सर्जरी के दौरान रीढ़ की हड्डी के कुछ हिस्सों को आखिरी समय तक सुरक्षित रखा जाता है। ऐसा करने से ऑपरेशन के दौरान शरीर में स्थिरता बनी रहती है और सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं या खतरों का जोखिम काफी कम हो जाता है।
पुराने इलाज और नए तरीके में क्या अंतर है?
पहले इस तरह की सर्जरी को बहुत जोखिम भरा माना जाता था क्योंकि इसमें नसों (Neurological) को नुकसान पहुंचने या जान जाने का खतरा रहता था। लेकिन अब बेहतर तकनीक और अनुभव की वजह से नतीजे काफी अच्छे मिल रहे हैं। इस इनोवेशन की चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है, जिससे स्पाइन केयर के क्षेत्र में भारत की साख बढ़ी है।
इलाज की शुरुआत और अनुभव
इस संशोधित तकनीक का जिक्र साल 2020 में एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रकाशन में किया गया था। प्रोफेसर भवुक गर्ग और उनकी टीम पिछले सात सालों से इस प्रक्रिया का इस्तेमाल मरीजों के इलाज के लिए कर रही है। इसके अलावा, AIIMS में ‘इंटरनेशनल स्पाइन डिफॉर्मिटी कोर्स’ जैसे प्रोग्राम भी चलाए जा रहे हैं ताकि अन्य डॉक्टर भी इसे सीख सकें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
AIIMS की यह नई तकनीक किन मरीजों के लिए फायदेमंद है?
यह तकनीक उन मरीजों के लिए है जिनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर और जटिल विकृतियां (Grotesque and severe spinal deformities) हैं और जिन्हें सामान्य सर्जरी से ठीक करना मुश्किल था।
क्या इस सर्जरी में जोखिम कम हुआ है?
हां, विशेषज्ञों के अनुसार पहले इन सर्जरी में न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं का डर रहता था, लेकिन नई संशोधित PVCR तकनीक से स्थिरता बढ़ी है और जोखिम कम हुआ है।