Delhi: दिल्ली एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों ने रीढ़ की हड्डी की गंभीर विकृतियों को ठीक करने के लिए एक आधुनिक सर्जिकल तकनीक विकसित की है। इस नई विधि से उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी जो पहले बहुत ज्यादा जोखिम की वजह से सर्जरी न
Delhi: दिल्ली एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों ने रीढ़ की हड्डी की गंभीर विकृतियों को ठीक करने के लिए एक आधुनिक सर्जिकल तकनीक विकसित की है। इस नई विधि से उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी जो पहले बहुत ज्यादा जोखिम की वजह से सर्जरी नहीं करा पाते थे। इस सफलता से अब मरीज कम खतरे के साथ अपनी सामान्य जिंदगी में वापस लौट सकेंगे।
क्या है यह नई तकनीक और कैसे करती है मदद?
एम्स के आर्थोपेडिक विभाग ने ‘पोस्टीरियर वर्टेब्रल कॉलम रिसेक्शन (PVCR)’ का एक बेहतर वर्जन तैयार किया है। डॉ. भावुक गर्ग और उनकी टीम पिछले सात सालों से इस पर काम कर रही है। इस तरीके में सर्जरी के दौरान रीढ़ की कुछ खास हिस्सों को आखिरी समय तक सुरक्षित रखा जाता है, जिससे ऑपरेशन के बाद रीढ़ की हड्डी ज्यादा स्थिर रहती है। इससे नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं और जानलेवा खतरों का जोखिम काफी कम हो गया है।
मरीजों के जीवन पर क्या असर पड़ेगा?
यह तकनीक उन लोगों के लिए उम्मीद लेकर आई है जिनकी रीढ़ की हड्डी बहुत ज्यादा टेढ़ी या विकृत हो चुकी थी। पहले ऐसे मामलों में इलाज के विकल्प बहुत कम थे और खतरा ज्यादा रहता था। अब इस संशोधित विधि से मरीजों की चलने-फिरने की क्षमता बढ़ी है और उनका आत्मविश्वास लौटा है। इस उपलब्धि की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की पहचान एक उन्नत मेडिकल सेंटर के रूप में बढ़ी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
एम्स की इस नई स्पाइन सर्जरी तकनीक का नाम क्या है?
इस तकनीक को ‘पोस्टीरियर वर्टेब्रल कॉलम रिसेक्शन (PVCR)’ का एक परिष्कृत या संशोधित संस्करण कहा गया है, जिसे डॉ. भावुक गर्ग और उनकी टीम ने विकसित किया है।
पुरानी सर्जरी के मुकाबले यह तकनीक क्यों बेहतर है?
यह विधि सर्जरी के दौरान रीढ़ की स्थिरता को बेहतर बनाती है और पारंपरिक प्रक्रियाओं में होने वाली तंत्रिका संबंधी (neurological) और अन्य जानलेवा जटिलताओं के जोखिम को कम करती है।