UP: नई दिल्ली और आगरा के बीच रेल यात्रा करने वालों के लिए अच्छी खबर है। कीठम से भांडई के बीच 26 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन का काम तेजी से चल रहा है। 600 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह लाइन मालगाड़ियों के दबाव को कम क
UP: नई दिल्ली और आगरा के बीच रेल यात्रा करने वालों के लिए अच्छी खबर है। कीठम से भांडई के बीच 26 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन का काम तेजी से चल रहा है। 600 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह लाइन मालगाड़ियों के दबाव को कम करेगी, जिससे यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा और आगरा कैंट स्टेशन पर ट्रेनों का बेवजह ठहराव कम होगा।
तीसरी रेल लाइन से क्या होगा फायदा
इस नई लाइन के बनने से रेल संचालन में बड़ा बदलाव आएगा। इस रूट पर रोजाना 270 से ज्यादा यात्री और 360 मालगाड़ियां चलती हैं, जिससे काफी भीड़ रहती है। नई लाइन शुरू होने के बाद लगभग 60 से 70 प्रतिशत मालगाड़ियां इसी रास्ते से गुजरेंगी। इसके अलावा सिकंदराबाद राजधानी समेत दो दर्जन से ज्यादा यात्री ट्रेनें भी इसका इस्तेमाल करेंगी, जिससे ट्रेनों की लेट होने की समस्या कम होगी।
परियोजना की मुख्य बातें और बजट
| विवरण |
जानकारी |
| कुल लंबाई |
26 किलोमीटर |
| अनुमानित लागत |
600 करोड़ रुपये |
| निर्माण एजेंसी |
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) |
| कुल बजट आवंटन |
1370 करोड़ रुपये (आगरा मंडल को) |
| भूमि अधिग्रहण |
लगभग 90 प्रतिशत पूरा |
| पूर्ण होने का समय |
एक वर्ष के भीतर उम्मीद |
अब तक क्या हुआ अपडेट
रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम लगभग पूरा कर लिया है और एक दर्जन से ज्यादा पुल और ROB बनाने का काम चल रहा है। हाल ही में नागर गांव में पुल निर्माण की मांग को लेकर किसानों का 186 दिनों से चल रहा धरना भी समाप्त हो गया है। साथ ही, कुबेरपुर और यमुना ब्रिज के बीच 9.77 किलोमीटर की एक अलग लाइन के लिए 159.76 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इस लाइन पर एक नया स्टेशन बनाने का प्रस्ताव भी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
तीसरी रेल लाइन से आम यात्रियों को क्या लाभ होगा
इस लाइन से मालगाड़ियों का दबाव कम होगा, जिससे आगरा कैंट स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव घटेगा और यात्री ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर चल सकेंगी।
इस प्रोजेक्ट का काम कब तक पूरा होने की उम्मीद है
कीठम से भांडई के बीच बन रही इस 26 किलोमीटर लंबी लाइन का काम तेजी से चल रहा है और इसके एक वर्ष के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।