Uttarakhand: देहरादून के एक मदरसे में बिहार, झारखंड और बंगाल के बच्चों को लाए जाने का मामला सामने आया है। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस मामले में मानव तस्करी और अन्य अनियमितताओं का संदेह जताया है। आयोग ने जांच
Uttarakhand: देहरादून के एक मदरसे में बिहार, झारखंड और बंगाल के बच्चों को लाए जाने का मामला सामने आया है। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस मामले में मानव तस्करी और अन्य अनियमितताओं का संदेह जताया है। आयोग ने जांच तेज करने के लिए देहरादून के एसएसपी और डीएम को पत्र भेजा है, साथ ही मदरसा संचालकों को 2 मई को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
मदरसे में क्या गड़बड़ियां मिलीं और जांच क्यों शुरू हुई?
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन डॉ. गीता खन्ना ने आजाद कॉलोनी स्थित एक मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। वहां बच्चों की हालत काफी खराब मिली, वे फर्श पर सो रहे थे और गंदगी में रह रहे थे। गर्मी के मौसम में भी बच्चे रजाई का इस्तेमाल कर रहे थे और वहां वेंटिलेशन की कमी थी। इसके अलावा, वहां योग्य शिक्षकों और पढ़ाई की सामग्री का भी अभाव पाया गया, जिससे प्रशासन को शक हुआ कि बच्चों को गलत तरीके से यहां लाया गया है।
सरकार ने मदरसों के लिए क्या कड़े कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरे मामले का संज्ञान लिया और राज्य के चार जिलों- देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल के सभी मदरसों में वेरिफिकेशन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को भंग करने का फैसला किया है। 1 जुलाई 2026 से सभी मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम का पालन करना होगा और नई अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। अब बिना मान्यता और नियमों के पालन के मदरसे नहीं चल सकेंगे।
नया नियम क्या कहता है और आगे क्या होगा?
नए नियमों के मुताबिक, मदरसों को सोसाइटी रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर्ड होना होगा और सभी वित्तीय लेन-देन आधिकारिक खातों के जरिए करने होंगे। किसी भी छात्र या शिक्षक पर धार्मिक गतिविधियों के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग अब यह जांच कर रहा है कि बच्चों को उनके माता-पिता की सहमति से लाया गया है या किसी ने उन्हें बहला-फुसलाकर यहां पहुंचाया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
देहरादून के मदरसे में जांच क्यों हो रही है?
मदरसे में बिहार और अन्य राज्यों के बच्चों के रहने की खराब स्थिति और उनके वहां लाए जाने के तरीके पर संदेह है, जिससे मानव तस्करी का एंगल सामने आया है।
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का क्या होगा?
सरकार ने मदरसा बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया है। 1 जुलाई 2026 से सभी मदरसे उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होंगे और नए नियमों का पालन करेंगे।