Colombia में भीषण भूकंप, 132 लोगों की मौत और 3 हजार से ज्यादा लापता, कई इमारतें जमींदोज
World: कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में सोमवार सुबह एक बहुत ही शक्तिशाली भूकंप आया जिससे वहां भारी तबाही मची है। 7.4 तीव्रता के इस भूकंप ने जान-माल का बड़ा नुकसान किया है और अब तक 132 लोगों की मौत की खबर है। मलबे में दबे ल
World: कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में सोमवार सुबह एक बहुत ही शक्तिशाली भूकंप आया जिससे वहां भारी तबाही मची है। 7.4 तीव्रता के इस भूकंप ने जान-माल का बड़ा नुकसान किया है और अब तक 132 लोगों की मौत की खबर है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू टीमें दिन-रात काम कर रही हैं।
यह भूकंप 10 अगस्त 2026 को सुबह करीब 7:34 बजे आया। इसका केंद्र सैन जोस डेल पाल्मार इलाके में था, जो बोगोटा से करीब 400 किलोमीटर दूर है। कोलंबिया की जियोलॉजिकल सर्विस ने इसे पिछले कई दशकों का सबसे शक्तिशाली भूकंप बताया है। झटके कोलंबिया के साथ-साथ पड़ोस के देशों इक्वाडोर और पनामा में भी महसूस किए गए।
तबाही की गंभीरता को देखते हुए कोलंबिया के राष्ट्रपति अबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला ने नेशनल इमरजेंसी घोषित कर दी है ताकि राहत कार्यों के लिए पैसा तुरंत मिल सके। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार अपनी पूरी ताकत लगाकर लोगों की जान बचाने और प्रभावित इलाकों में मदद पहुंचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने खुद आपदा क्षेत्र का दौरा करने की बात भी कही है।
इस आपदा में नुकसान का आंकड़ा काफी डराने वाला है।
| विवरण | आंकड़ा/प्रभाव |
|---|---|
| कुल मौतें | 132 लोग |
| घायल | 620 से ज्यादा |
| लापता | 3,000 से अधिक |
| पूरी तरह गिरी इमारतें | 61 से 86 |
| क्षतिग्रस्त घर | करीब 1,600 |
| प्रभावित स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र | 52 स्कूल और 18 हेल्थ सेंटर |
| बंद हुए एयरपोर्ट | 6 से 7 एयरपोर्ट |
भूकंप के बाद वहां हालात काफी खराब हैं। मुख्य झटके के एक घंटे के भीतर ही 5.0 तीव्रता का एक और झटका महसूस किया गया, जबकि 2.8 और 4.8 तीव्रता के अन्य आफ्टरशॉक्स भी आए। पेरेरा, काली और क्विब्डो जैसे शहरों में भारी नुकसान हुआ है। बुनियादी ढांचे की तबाही के कारण कई एयरपोर्ट्स का कामकाज रोक दिया गया है।
अमेरिका, फ्रांस, इटली और अल साल्वाडोर जैसे देशों ने कोलंबिया के प्रति अपनी संवेदनाएं जताई हैं और मदद की पेशकश की है। Direct Relief और Americares जैसी संस्थाएं वहां मेडिकल मदद पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं। जानकारों का कहना है कि यह इलाका ‘रिंग ऑफ फायर’ में आता है, जहां भूकंप आने का खतरा हमेशा रहता है। चोको क्षेत्र के ग्रामीण और गरीब होने की वजह से वहां राहत पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।