Delhi में 20 जुलाई को संसद मार्च करेगा CJP, सोनम वांगचुक भी होंगे शामिल; छात्रों और अभिभावकों से जुड़ने की अपील

Delhi: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 20 जुलाई 2026 को संसद की ओर मार्च निकालने का ऐलान किया है। यह मार्च जंतर मंतर से शुरू होगा और इसमें शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल होंगे। CJP ने देश भर के छात्रों

Delhi: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 20 जुलाई 2026 को संसद की ओर मार्च निकालने का ऐलान किया है। यह मार्च जंतर मंतर से शुरू होगा और इसमें शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल होंगे। CJP ने देश भर के छात्रों और उनके माता-पिता से इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

यह मार्च संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित किया जाएगा। CJP का कहना है कि परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों पर सरकार की जवाबदेही तय करना जरूरी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर भी आरोप लगाया कि भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शन स्थल पर तिरपाल लगाने से रोका गया।

सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। 9 जुलाई तक उनकी हड़ताल के 12 दिन पूरे हो चुके हैं। डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक, 11वें दिन तक उनका वजन 7 किलो कम होकर 59.40 किलो रह गया था, हालांकि वे मानसिक रूप से अलर्ट हैं। वांगचुक ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपील की है कि वे शारीरिक रूप से इस मार्च में शामिल हों क्योंकि छात्रों की समस्याओं के लिए संसद ही सही मंच है।

जंतर मंतर पर CJP का विरोध प्रदर्शन 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने भी सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया है। हाल ही में AISA के एक सदस्य हृषिकेश को भूख हड़ताल के कारण तबीयत बिगड़ने पर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) का एक प्रतिनिधिमंडल भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचा था।

नियमों के मुताबिक, जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति और NOC लेना जरूरी होता है। यहां आमतौर पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक प्रदर्शन की अनुमति मिलती है और भीड़ की एक सीमा तय होती है। रायसीना हिल और आसपास के इलाकों में धारा 144 लागू रहती है, जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण मार्च निकालने के निर्देश दिए जाते हैं।