Delhi: केंद्र सरकार लुटियंस दिल्ली के बीचों-बीच स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि इस जमीन का इस्तेमाल सार्वजनिक लाभ और रक्षा जरूरतों के लिए किया जाएगा। इस फैसले के ब
Delhi: केंद्र सरकार लुटियंस दिल्ली के बीचों-बीच स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि इस जमीन का इस्तेमाल सार्वजनिक लाभ और रक्षा जरूरतों के लिए किया जाएगा। इस फैसले के बाद अब यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है, जहां कोर्ट ने शहर की हरियाली खत्म होने पर चिंता जताई है।
केंद्र सरकार क्यों लेना चाहती है यह जमीन?
केंद्र सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले Land and Development Office (L&DO) ने 20 मई 2026 को इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) को बेदखली का नोटिस जारी किया था। सरकार का कहना है कि इस जमीन के साथ-साथ दिल्ली जिमखाना क्लब और दिल्ली रेस क्लब के इलाके को भी फिर से विकसित किया जाएगा। सरकारी वकील आशीष दीक्षित ने बताया कि सेंट्रल दिल्ली में सरकारी कामों के लिए जगह की कमी है, इसलिए इस पूरे क्षेत्र का पुनर्विकास जरूरी है।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं और क्या हुआ फैसला?
इंडियन पोलो एसोसिएशन ने इस बेदखली के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर दिल्ली के इन हरे-भरे इलाकों को खत्म कर दिया गया, तो दिल्ली का दम घुट जाएगा। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या यहां ऊंची इमारतें बनाना वाकई जनहित में है। फिलहाल, कोर्ट ने जिला अदालत को इस मामले पर जल्द फैसला करने को कहा है और केंद्र सरकार ने भरोसा दिया है कि 12 जून तक कोई जबरन बेदखली नहीं की जाएगी।
लीज को लेकर क्या है पूरा विवाद?
यह जमीन मूल रूप से 24 फरवरी 1951 को दिल्ली पोलो क्लब को 20 साल की लीज पर दी गई थी। IPA का दावा है कि इस लीज को आगे बढ़ाया गया था और उन्होंने 31 मार्च 2030 तक का किराया चुका दिया है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि लीज 1993 में ही खत्म हो गई थी और तब से IPA वहां अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए है। यह पूरी कार्रवाई पब्लिक प्रिसिसेस (इविकशन ऑफ अनऑथोराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट, 1971 के तहत की जा रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जयपुर पोलो ग्राउंड पर केंद्र सरकार का क्या दावा है?
सरकार का कहना है कि इस जमीन की लीज 1993 में खत्म हो चुकी है और अब इसका उपयोग रक्षा जरूरतों और सार्वजनिक लाभ के लिए किया जाएगा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने चिंता जताई कि NDMC क्षेत्र के हरे-भरे इलाके कम होने से दिल्ली के लोगों का दम घुटने लगेगा।