Maharashtra: Central Railway की गैर-किराया कमाई में 17% का उछाल, 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की हुई आय

Maharashtra: सेंट्रल रेलवे (CR) ने अपनी गैर-किराया कमाई (Non-fare revenue) में बड़ी बढ़त दर्ज की है। इस साल मई तक रेलवे ने 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 17 करोड़ रुपये था। यह

Maharashtra: सेंट्रल रेलवे (CR) ने अपनी गैर-किराया कमाई (Non-fare revenue) में बड़ी बढ़त दर्ज की है। इस साल मई तक रेलवे ने 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 17 करोड़ रुपये था। यह करीब 17% की बढ़ोतरी है।

सेंट्रल रेलवे के मुख्य प्रवक्ता स्वप्निल निला ने बताया कि रेलवे अब केवल यात्रियों के टिकट से ही नहीं, बल्कि अपनी संपत्तियों का सही इस्तेमाल कर कमाई के नए तरीके खोज रहा है। इसके लिए ई-नीलामी (e-auction) और विज्ञापन जैसे विकल्पों का सहारा लिया जा रहा है। मई महीने में ही रेलवे ने ई-नीलामी के जरिए 29 कॉन्ट्रैक्ट दिए, जिससे सालाना 4 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस मिलने की उम्मीद है।

कमाई बढ़ाने के लिए मुंबई डिवीजन ने ट्रेनों और स्टेशनों पर विज्ञापनों का सहारा लिया है। प्रीमियम ट्रेनों की बाहरी बॉडी और अंदरूनी हिस्सों में विज्ञापन लगाने के अधिकार दिए गए हैं।

ट्रेन/साइट सालाना कमाई
वंदे भारत एक्सप्रेस (CSMT-मडगांव) हेडरेस्ट विज्ञापन 17 लाख रुपये
महानगरी एक्सप्रेस (Vinyl Wrap) 13.2 लाख रुपये
डेक्कन एक्सप्रेस और जनशताब्दी एक्सप्रेस 12.50 लाख रुपये (प्रत्येक)
CSMT-लातूर और CSMT-बीदर रूट 6.5 लाख रुपये (प्रत्येक)
नवी मुंबई एयरपोर्ट रोड (3 होर्डिंग्स) 1.32 करोड़ रुपये
मूलुंड-गोरेगांव लिंक रोड साइट 17.10 लाख रुपये
LTT रेल कोच रेस्टोरेंट 48.1 लाख रुपये

इसके अलावा ठाणे स्टेशन पर कैंटीन, कियोस्क और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के लिए भी कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं। रेलवे के नियमों के मुताबिक, विज्ञापनों के लिए ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (IREPS) का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, शराब, तंबाकू, अश्लील सामग्री और रेलवे दुर्घटनाओं के खिलाफ निजी बीमा जैसे विज्ञापनों पर पूरी तरह पाबंदी है। किसी भी विज्ञापन को शुरू करने से पहले डिविजनल अथॉरिटी से मंजूरी लेना जरूरी होता है।