Maharashtra: सेंट्रल रेलवे ने सरकारी टेंडर के जरिए फर्जी इलेक्ट्रिकल उपकरण सप्लाई करने वाले एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में रेलवे ने जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। यह मामला तब सामने आया जब ट्
Maharashtra: सेंट्रल रेलवे ने सरकारी टेंडर के जरिए फर्जी इलेक्ट्रिकल उपकरण सप्लाई करने वाले एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में रेलवे ने जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। यह मामला तब सामने आया जब ट्रेन के कोच में सुरक्षा उपकरणों ने काम करना बंद कर दिया था, जिससे यात्रियों की जान को खतरा हो सकता था।
कैसे खुला फर्जी सामान का मामला?
इस पूरे घोटाले की शुरुआत 7 मार्च 2026 को हुई थी। उस दिन एक ट्रेन कोच से धुआं निकलता देखा गया था। जांच में पता चला कि हाई-वोल्टेज स्थिति के दौरान Motor Protection Circuit Breaker (MPCB) फेल हो गया था। यह डिवाइस बिजली के झटकों और शॉर्ट सर्किट से बचाने के लिए लगाया जाता है। जब इसकी गहराई से जांच हुई, तो पता चला कि सप्लाई किया गया सामान नकली था।
टेंडर और सप्लाई की पूरी जानकारी
रेलवे ने इस सामान के लिए नवंबर 2025 में टेंडर निकाला था। इसके बाद कोलकाता की एक कंपनी ने यह टेंडर लिया और जनवरी 2026 में सामान की डिलीवरी की। कंपनी ने दावा किया था कि ये उपकरण एक नामी ब्रांड के असली प्रोडक्ट्स हैं और साथ में फर्जी टेस्ट सर्टिफिकेट भी दिए थे।
| विवरण |
जानकारी |
| टेंडर का समय |
नवंबर 2025 |
| सप्लाई का समय |
जनवरी 2026 |
| घटना की तारीख |
7 मार्च 2026 |
| FIR की तारीख |
16 मई 2026 |
| सप्लाई करने वाली कंपनी |
कोलकाता स्थित फर्म |
| फर्जी उपकरण |
Motor Protection Circuit Breakers (MPCBs) |
अब आगे क्या कार्रवाई होगी?
सेंट्रल रेलवे ने आरोपी कंपनी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा उपकरणों के साथ ऐसी छेड़छाड़ गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती थी। फिलहाल इस मामले की आगे की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MPCB क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
MPCB का मतलब Motor Protection Circuit Breaker है। यह रेलवे कोच में बिजली की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है ताकि हाई-वोल्टेज या शॉर्ट सर्किट होने पर यह पावर सप्लाई काटकर दुर्घटनाओं को रोक सके।
इस घोटाले में किस कंपनी पर कार्रवाई हुई है?
इस मामले में कोलकाता की एक कंपनी पर FIR दर्ज की गई है, जिसने नवंबर 2025 के टेंडर के तहत जनवरी 2026 में फर्जी इलेक्ट्रिकल उपकरण और नकली टेस्ट सर्टिफिकेट सप्लाई किए थे।