Delhi: CBSE ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा, लेकिन स्कूलों और अभिभावकों के बीच इसे लेकर काफी उलझन है। सत्र शुरू होने के बाद बीच में आए इस बदलाव स
Delhi: CBSE ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा, लेकिन स्कूलों और अभिभावकों के बीच इसे लेकर काफी उलझन है। सत्र शुरू होने के बाद बीच में आए इस बदलाव से दिल्ली के कई स्कूलों ने नाराजगी जताई है और इसे छात्रों के साथ प्रयोग बताया है।
क्या है CBSE का नया थ्री-लैंग्वेज रूल
CBSE ने 15 मई 2026 को एक सर्कुलर जारी किया जिसके तहत अब छात्रों को तीन भाषाएं (R1, R2 और R3) पढ़नी होंगी। नियम के मुताबिक, इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए। अगर कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी ले सकता है जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों, या फिर वह उसे चौथी भाषा के तौर पर पढ़ सकता है।
बोर्ड परीक्षा और पढ़ाई का क्या होगा तरीका
छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के लिए CBSE ने यह तय किया है कि तीसरी भाषा (R3) की कोई बोर्ड परीक्षा कक्षा 10 में नहीं होगी। इसका पूरा मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही आंतरिक रूप से किया जाएगा और इसका परिणाम सर्टिफिकेट में दिखेगा। शुरुआती दौर में कक्षा 9 के छात्र तीसरी भाषा के लिए कक्षा 6 की किताबों का इस्तेमाल करेंगे, जब तक कि सेकेंडरी लेवल की नई किताबें नहीं आ जातीं।
दिल्ली के स्कूलों और अभिभावकों की चिंताएं
दिल्ली के स्कूलों के प्रिंसिपल्स का कहना है कि सत्र शुरू होने के बाद यह नियम लाना गलत समय पर लिया गया फैसला है। टैगोर इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल मल्लिका प्रेमन ने इसे अस्पष्ट बताया है। वहीं, कुछ स्कूलों में डर है कि विदेशी भाषा के शिक्षकों की नौकरी जा सकती है। अभिभावकों का कहना है कि न तो पर्याप्त किताबें उपलब्ध हैं और न ही ट्रेंड टीचर्स, जिससे बच्चों पर दबाव बढ़ेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी?
नहीं, तीसरी भाषा (R3) के लिए कक्षा 10 में कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका असेसमेंट पूरी तरह से स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा।
यह नियम कब से लागू हो रहा है और कौन सी भाषाएं पढ़नी होंगी?
यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा। छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी अनिवार्य हैं।