Haryana: सरकारी पैसों की हेराफेरी के एक बड़े मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने चंडीगढ़, पंचकुला और दिल्ली-NCR में कुल छह ठिकानों पर छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई करीब 661 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ी
Haryana: सरकारी पैसों की हेराफेरी के एक बड़े मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने चंडीगढ़, पंचकुला और दिल्ली-NCR में कुल छह ठिकानों पर छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई करीब 661 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ी है, जिसमें हरियाणा कैडर के बड़े सरकारी अधिकारियों और एक प्राइवेट कंपनी की मिलीभगत का शक है।
CBI ने किन जगहों पर की छापेमारी और कौन हैं इसमें शामिल
CBI ने शुक्रवार, 6 जून 2026 को यह सर्च ऑपरेशन चलाया। छापेमारी के दौरान हरियाणा कैडर के सीनियर सरकारी कर्मचारियों के घरों के साथ-साथ नोएडा स्थित M/s. Vipam Consultancy Pvt. Ltd. और उसके डायरेक्टर के ठिकानों की तलाशी ली गई। जांच एजेंसी को शक है कि इन लोगों ने मिलकर सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल किया और अपराध से कमाई गई रकम को अपने खातों में लिया।
कैसे हुआ 661 करोड़ रुपये का यह घोटाला
जांच में सामने आया है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने फर्जी तरीके से अकाउंट खुलवाए, सरकारी फंड ट्रांसफर किए और फिर उन पैसों को दूसरी जगह डाइवर्ट कर दिया। इस खेल में IDFC First Bank और AU Finance Bank के खातों का इस्तेमाल हुआ। बताया जा रहा है कि सरकारी पैसा पहले Vipam Consultancy के खाते में गया और वहां से डायरेक्टर के पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया गया।
छापेमारी में क्या मिला और अब आगे क्या होगा
CBI ने इस कार्रवाई के दौरान कई जरूरी दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और प्रॉपर्टी के कागजात जब्त किए हैं। इस मामले में हरियाणा सरकार के आठ विभागों, चंडीगढ़ नगर निगम और CREST चंडीगढ़ की भूमिका की जांच हो रही है। CBI ने पहले ही पंचकुला कोर्ट में एक चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
CBI ने किन बैंकों और कंपनियों की जांच की है
CBI ने नोएडा की M/s. Vipam Consultancy Pvt. Ltd. और IDFC First Bank व AU Finance Bank में हुए संदिग्ध लेन-देन की जांच की है।
इस घोटाले में कौन-कौन से सरकारी विभाग शामिल हैं
इस मामले में हरियाणा सरकार के 8 विभागों के साथ-साथ चंडीगढ़ नगर निगम और हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों की भूमिका की जांच हो रही है।