Fake medicine case: CBI ने IPS Deepak Gahlawat की जमानत का किया विरोध, कहा- गवाहों को धमका सकते हैं आरोपी

Delhi: नकली दवाइयों के कारोबार से जुड़े रिश्वत मामले में CBI ने कड़ा रुख अपनाया है। एजेंसी ने Rouse Avenue कोर्ट में एक जवाब दाखिल कर IPS अधिकारी Deepak Gahlawat की जमानत याचिका का विरोध किया है। CBI का कहना है कि अगर गह

Delhi: नकली दवाइयों के कारोबार से जुड़े रिश्वत मामले में CBI ने कड़ा रुख अपनाया है। एजेंसी ने Rouse Avenue कोर्ट में एक जवाब दाखिल कर IPS अधिकारी Deepak Gahlawat की जमानत याचिका का विरोध किया है। CBI का कहना है कि अगर गहलवत को जमानत मिली, तो वह मामले के गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

यह पूरा मामला 3 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने से जुड़ा है। आरोप है कि 2012 बैच के हरियाणा कैडर के IPS अधिकारी Deepak Gahlawat ने नकली दवाइयों के रैकेट की CBI जांच को प्रभावित करने के लिए रिश्वत मांगी थी। CBI ने कोर्ट को बताया कि उनके पास कई बैंक ट्रांजैक्शन के सबूत हैं, जो इस मामले में अहम कड़ी हैं।

घटनाक्रम की बात करें तो 1 जुलाई 2026 को CBI ने दीपक गहलवत को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 16 जुलाई 2026 को उन्होंने नियमित जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। हालांकि, 17 जुलाई 2026 को CBI ने कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर जमानत का विरोध किया। इससे पहले 3 जुलाई को कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

इस पूरे खेल की शुरुआत 8 जून 2026 को हुई थी जब CBI ने एक दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर और दो निजी व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। जांच में पता चला कि पुडुचेरी के कारोबारी N Raja, जो करीब 5,000 करोड़ रुपये के नकली दवा रैकेट का मुख्य आरोपी है, उसने जांच से बचने के लिए गहलवत से संपर्क किया था। आरोप है कि 14 मई को हुई एक मीटिंग में 3 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। इस सौदे में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर Pradeep Kumar Singh और बिचौलिए Rajkumar की भूमिका भी सामने आई है।

हालांकि, इस मामले में स्पेशल जज Sushant Changotra ने पहले CBI की जांच पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि अभी तक ऐसे पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं जिससे यह साबित हो कि गहलवत ने CBI के किसी अधिकारी को प्रभावित किया हो। कोर्ट ने जांच अधिकारी के जवाबों को भी अस्पष्ट बताया था।