Maharashtra में पेड़ लगाने के काम में बड़ी लापरवाही, CAG की रिपोर्ट में खुलासा; आधे से भी कम हुआ लक्ष्य पूरा
Maharashtra: राज्य में पर्यावरण को बचाने के लिए चलाए जा रहे कंपेंसेटरी अफोरेस्टेशन (प्रतिपूरक वनीकरण) अभियान में बड़ी गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। Comptroller and Auditor General (CAG) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया
Maharashtra: राज्य में पर्यावरण को बचाने के लिए चलाए जा रहे कंपेंसेटरी अफोरेस्टेशन (प्रतिपूरक वनीकरण) अभियान में बड़ी गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। Comptroller and Auditor General (CAG) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने जितने पेड़ लगाने की योजना बनाई थी, उसका आधा काम भी पूरा नहीं हो पाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 47.37% वनीकरण ही किया गया है।
CAG की ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां पकड़ी गई हैं। नियमों के मुताबिक, अगर कहीं जंगल काटे जाते हैं, तो उसकी भरपाई के लिए गैर-वन भूमि (non-forest land) पर पेड़ लगाने होते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा नहीं हुआ। ऑडिट में पाया गया कि 114 में से 60 प्रोजेक्ट्स में गैर-वन भूमि की तलाश करने के बजाय पहले से मौजूद वन भूमि पर ही पेड़ लगा दिए गए, जिससे पर्यावरण को कोई अतिरिक्त फायदा नहीं मिला।
रिपोर्ट में पैसों के हेर-फेर और गलत मैनेजमेंट का भी जिक्र है। बताया गया है कि CAMPA फंड से 95 करोड़ रुपये का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, गोरेवाड़ा जू (Gorewada Zoo) में रेस्क्यू सेंटर बनाने के लिए 5.5 करोड़ रुपये दिए गए, जो कि CAF Rules 2018 के खिलाफ था। साथ ही, गलत जगह का चुनाव करने की वजह से 2,593 हेक्टेयर जमीन पर पेड़ नहीं लगाए जा सके।
| गड़बड़ी का विवरण | आंकड़े/विवरण |
|---|---|
| कुल पूरा हुआ वनीकरण | सिर्फ 47.37% |
| गलत जमीन का चुनाव (वन भूमि का उपयोग) | 60 प्रोजेक्ट्स (3,777 हेक्टेयर) |
| अनुपयुक्त साइट के कारण छूटा काम | 2,593 हेक्टेयर |
| बिना नोटिफिकेशन वाली जमीन | 5,727 हेक्टेयर |
| CAMPA फंड का गलत इस्तेमाल | 95 करोड़ रुपये |
| नियमों के खिलाफ Zoo फंड खर्च | 5.5 करोड़ रुपये |
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मार्च 2024 तक 5,727 हेक्टेयर जमीन को रिजर्व्ड या प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट के रूप में नोटिफाई नहीं किया गया था, जिससे वह जमीन कानूनी सुरक्षा से बाहर रही। इसके अलावा, महाराष्ट्र CAMPA की गवर्निंग बॉडी ठीक से काम नहीं कर रही थी और समय पर बैठकें नहीं हुईं, जिसकी वजह से पूरे काम की निगरानी में भारी कमी रही।