UP : बुलंदशहर के औरंगाबाद इलाके में पुलिस ने एक ग्राम प्रधान को उनके घर में ही नजरबंद कर दिया है। इलाना ग्राम पंचायत के प्रधान योगेंद्र सिंह को 19 मई, 2026 को पुलिस ने रोका ताकि वे लखनऊ में होने वाले ग्राम प्रधानों के प्
UP : बुलंदशहर के औरंगाबाद इलाके में पुलिस ने एक ग्राम प्रधान को उनके घर में ही नजरबंद कर दिया है। इलाना ग्राम पंचायत के प्रधान योगेंद्र सिंह को 19 मई, 2026 को पुलिस ने रोका ताकि वे लखनऊ में होने वाले ग्राम प्रधानों के प्रदर्शन में शामिल न हो सकें। पुलिस सुबह से ही उनके आवास पर तैनात थी ताकि आंदोलन को विफल किया जा सके।
ग्राम प्रधानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन के सदस्य समय पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। प्रधानों का कार्यकाल 26 मई और 19 जुलाई, 2026 को समाप्त हो रहा है। वे चाहते हैं कि कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति न हो। उनकी मांग है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह वर्तमान निर्वाचित प्रधानों को ही प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के साथ कार्यवाहक प्रशासक बनाया जाए।
सरकार ने प्रदर्शनकारियों को क्या आश्वासन दिया?
लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर 18 मई को हुए बड़े प्रदर्शन के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ग्राम प्रधानों से मुलाकात की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को मिठाई खिलाई और भरोसा दिलाया कि सरकार पंचायत चुनावों को समय पर कराने के लिए प्रतिबद्ध है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी प्रतिनिधिमंडल से बात की और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
आंदोलन में देरी के क्या कारण बताए गए?
प्रधान संघ का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में देरी और समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना बड़ी समस्याएं हैं। इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय की गई ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया का काम भी अभी अधूरा है। प्रधानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ, तो वे पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन करेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
योगेंद्र सिंह को नजरबंद क्यों किया गया?
बुलंदशहर के इलाना ग्राम पंचायत के प्रधान योगेंद्र सिंह को औरंगाबाद पुलिस ने इसलिए नजरबंद किया ताकि वे लखनऊ में अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन द्वारा आयोजित प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।
ग्राम प्रधानों का मुख्य विरोध किस बात को लेकर है?
प्रधानों की मुख्य मांग समय पर पंचायत चुनाव कराना है। वे चाहते हैं कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों की जगह वर्तमान प्रधानों को ही कार्यवाहक प्रशासक के रूप में वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं।