Hormuz जलडमरूमध्य में ब्रिटेन और फ्रांस की नौसेना की तैनाती, ईरान ने दी चेतावनी
World : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रास्तों में से एक, Strait of Hormuz में तनाव बढ़ गया है। ब्रिटेन और फ्रांस ने यहां अपनी नौसेना भेजने का फैसला किया है ताकि समुद्री जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके और पानी में बिछी
World : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रास्तों में से एक, Strait of Hormuz में तनाव बढ़ गया है। ब्रिटेन और फ्रांस ने यहां अपनी नौसेना भेजने का फैसला किया है ताकि समुद्री जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके और पानी में बिछी बारूदी सुरंगों (mines) को हटाया जा सके। इस कदम के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे बाहरी ताकतों का हस्तक्षेप बताया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने बताया कि उन्होंने मिडिल ईस्ट में दो माइन काउंटरमेजर जहाज, दो फ्रिगेट और एक समुद्री गश्ती विमान तैनात कर दिया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer और Macron ने एक साझा बयान में कहा कि इस रास्ते पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। यह मिशन पूरी तरह से बचाव के लिए है ताकि व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा मिल सके। इस ऑपरेशन में जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम और कनाडा समेत दस से ज्यादा यूरोपीय देश मदद करेंगे। ओमान ने भी अपने समुद्री क्षेत्र में ब्रिटेन और फ्रांस के साथ सहयोग करने की सहमति दी है।
दूसरी तरफ, ईरान ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi ने इसे एक खतरनाक कदम बताया और कहा कि इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल वहां के तटवर्ती देशों की है। ईरान का मानना है कि बाहरी देशों की मौजूदगी से टकराव का खतरा बढ़ेगा। इससे पहले जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ था ताकि दुश्मनी खत्म हो और रास्ता खुले, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम से वह समझौता कमजोर पड़ता दिख रहा है।
आम आदमी के लिए यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बहुत सारी गैस इसी रास्ते से गुजरती है। अगर यहां तनाव बढ़ता है और तेल की सप्लाई रुकती है, तो इसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे भारत के बाजारों में भी महंगाई बढ़ सकती है।