Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य के प्राइवेट अनएडेड और माइनॉरिटी स्कूलों के शिक्षकों और अन्य स्टाफ को जनगणना (Census) की ड्यूटी से राहत दी है। कोर्ट ने शुक्रवार, 22 मई 2026 को इस पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले स
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य के प्राइवेट अनएडेड और माइनॉरिटी स्कूलों के शिक्षकों और अन्य स्टाफ को जनगणना (Census) की ड्यूटी से राहत दी है। कोर्ट ने शुक्रवार, 22 मई 2026 को इस पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले से राज्य के 500 से ज्यादा स्कूलों के स्टाफ को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें जनगणना के काम में लगाने के आदेश दिए गए थे।
कोर्ट ने इस फैसले का क्या कारण बताया?
जस्टिस गौतम ए. अंखाड और जस्टिस संदेश डी. पाटिल की बेंच ने कहा कि Census Act या इसके नियमों में ऐसा कोई साफ प्रावधान नहीं है, जो प्राइवेट अनएडेड या माइनॉरिटी स्कूलों के स्टाफ को जनगणना ड्यूटी के लिए मजबूर करे। कोर्ट ने माना कि अगर बड़ी संख्या में टीचर जनगणना के काम में लग जाएंगे, तो स्कूलों की पढ़ाई बाधित होगी और छात्रों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ेगा।
अब आगे क्या होगा और नियम क्या कहते हैं?
स्कूलों की तरफ से सीनियर एडवोकेट वेंकटेश ढोंड ने दलील दी कि Census Act, 1948 की धारा 4A के तहत सिर्फ ‘लोकल अथॉरिटी’ को स्टाफ देने का निर्देश दिया जा सकता है, जिसमें प्राइवेट स्कूल नहीं आते। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि RTE Act, 2009 की धारा 27 शिक्षकों को जनगणना में लगाने की अनुमति तो देती है, लेकिन यह सरकार को प्राइवेट कर्मचारियों को जबरन बुलाने की ताकत नहीं देती।
प्रशासन और स्कूलों के लिए कोर्ट के निर्देश
हाई कोर्ट ने प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अब किसी भी टीचर पर जनगणना ड्यूटी के लिए दबाव न डालें और न ही कोई नई आदेश जारी करें। साथ ही, जो स्टाफ ड्यूटी पर नहीं गया है, उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 को तय की है और सरकार से चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह रोक किन स्कूलों पर लागू होती है?
यह रोक महाराष्ट्र के उन सभी प्राइवेट अनएडेड (Private Unaided) और माइनॉरिटी स्कूलों पर लागू होती है जिनके स्टाफ को जनगणना ड्यूटी के लिए नोटिस मिले थे। इसमें राज्य के 500 से अधिक स्कूल शामिल हैं।
अगली सुनवाई कब है और कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?
इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई 2026 को होगी। कोर्ट ने सरकार और संबंधित अधिकारियों को चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।