Maharashtra: मुंबई के दादर इलाके में डॉ बी.आर. अंबेडकर द्वारा स्थापित ऐतिहासिक बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस को आधी रात में गिराए जाने का मामला अब गरमा गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस घटना पर मुंबई पुलिस की लापरवाही और उनके
Maharashtra: मुंबई के दादर इलाके में डॉ बी.आर. अंबेडकर द्वारा स्थापित ऐतिहासिक बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस को आधी रात में गिराए जाने का मामला अब गरमा गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस घटना पर मुंबई पुलिस की लापरवाही और उनके द्वारा दिए गए जवाब पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने पुलिस के हलफनामे को ‘सोच-समझकर न लिखा गया’ और ‘परेशान करने वाला’ बताया है।
क्या था पूरा मामला और कोर्ट ने क्या कहा
यह घटना 25 जून 2016 की है जब करीब 400 से 500 लोगों की भीड़ ने आधी रात को इस ऐतिहासिक प्रेस को ढहा दिया था। कोर्ट ने जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खटा की बेंच के जरिए कहा कि रात 12 बजे से सुबह 7 बजे के बीच बीएमसी या किसी भी अथॉरिटी द्वारा तोड़फोड़ करना बहुत दुर्लभ है। कोर्ट ने माना कि पुलिस ने इस अवैध तोड़फोड़ को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे और अब वे इसे गलत तरीके से सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस और BMC कमिश्नर को दिए गए कड़े निर्देश
हाई कोर्ट ने अब मुंबई पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया है कि वे खुद एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। इसमें उन्हें उन अधिकारियों के नाम बताने होंगे जो घटना के समय भोइवाड़ा पुलिस स्टेशन में तैनात थे। इसके साथ ही बीएमसी कमिश्नर को भी इस मामले में शामिल किया गया है। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि क्या इस तोड़फोड़ के लिए कोई औपचारिक अनुमति दी गई थी और क्या मुंबई में आधी रात को तोड़फोड़ करना एक सामान्य प्रक्रिया है।
किसने दायर की याचिका और क्या हैं आरोप
यह याचिका डॉ अंबेडकर के पोते और वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश अंबेडकर ने लगाई थी। आरोप है कि प्रेस के कुछ ट्रस्टियों ने आपसी विवाद के चलते एक गलत स्ट्रक्चर ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर इस तोड़फोड़ को अंजाम दिया। आनंद अंबेडकर ने उस समय भोइवाड़ा पुलिस स्टेशन से मदद मांगी थी लेकिन पुलिस ने उनकी सहायता नहीं की। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना कब हुई थी
इस ऐतिहासिक प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना डॉ बी.आर. अंबेडकर ने 1945 में की थी। उन्होंने इसके लिए दादर में जमीन 1930 में खरीदी थी।
हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से क्या मांगा है
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को छह हफ्ते के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा देने और घटना के समय भोइवाड़ा पुलिस स्टेशन में तैनात अधिकारियों के नाम उजागर करने को कहा है।