Maharashtra: मुंबई में बाबासाहेब बी आर अंबेडकर द्वारा 1945 में स्थापित ऐतिहासिक ‘बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस’ को गिराए जाने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस के व्यवहार और उ
Maharashtra: मुंबई में बाबासाहेब बी आर अंबेडकर द्वारा 1945 में स्थापित ऐतिहासिक ‘बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस’ को गिराए जाने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस के व्यवहार और उनके द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे को बेहद चौंकाने वाला बताया है। जस्टिस ए एस गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने इस पूरे मामले में मुंबई पुलिस कमिश्नर से व्यक्तिगत जवाब मांगा है।
पुलिस के हलफनामे पर कोर्ट ने क्यों जताया ऐतराज?
हाई कोर्ट ने पाया कि 28 अप्रैल 2026 को एक असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर ने जो हलफनामा दाखिल किया था, वह बहुत ही लापरवाही भरा था। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने मामले की गहराई को समझे बिना ही जवाब दे दिया, जो कि काफी परेशान करने वाला है। पुलिस ने यह तर्क दिया था कि शिकायतकर्ताओं के पास जरूरी दस्तावेज नहीं थे, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को नाकाफी माना और पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।
प्रेस को गिराने की घटना और कोर्ट की आपत्तियां
यह ऐतिहासिक प्रेस 25 जून 2016 की आधी रात को गिराया गया था। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि बीएमसी या कोई भी सरकारी संस्था रात 12 बजे से सुबह 7 बजे के बीच तोड़फोड़ की कार्रवाई कैसे कर सकती है, जो कि बहुत दुर्लभ है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रेस में बाबासाहेब के हाथ से लिखे महत्वपूर्ण दस्तावेज थे, जो इस कार्रवाई के दौरान चोरी हो गए या नष्ट हो गए।
अब आगे क्या होगा और किन अधिकारियों से जवाब मांगा गया है?
कोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को छह हफ्ते के भीतर एक विस्तृत हलफनामा देने का आदेश दिया है। इसमें भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन के उन अधिकारियों के नाम मांगे गए हैं जो उस रात ड्यूटी पर थे। साथ ही बीएमसी कमिश्नर से भी पूछा गया है कि क्या इतनी रात को तोड़फोड़ करना मुंबई में एक सामान्य प्रक्रिया है और क्या इसके लिए जरूरी अनुमति ली गई थी। इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून 2026 को होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस को कब गिराया गया था?
यह ऐतिहासिक प्रिंटिंग प्रेस, जिसकी स्थापना बाबासाहेब अंबेडकर ने 1945 में की थी, 25 जून 2016 की आधी रात को गिराया गया था।
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से क्या जानकारी मांगी है?
कोर्ट ने छह हफ्ते में जवाब मांगा है कि घटना के समय भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में कौन से अधिकारी तैनात थे और क्या इंटेलिजेंस विभाग इस बारे में सक्रिय था।