Maharashtra: नवी मुंबई के ऐरोली में एक 6 साल के बच्चे को सिर्फ इसलिए स्कूल में दाखिला नहीं दिया गया क्योंकि उसके पिता के पास रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट नहीं था। इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए एडमिशन र
Maharashtra: नवी मुंबई के ऐरोली में एक 6 साल के बच्चे को सिर्फ इसलिए स्कूल में दाखिला नहीं दिया गया क्योंकि उसके पिता के पास रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट नहीं था। इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए एडमिशन रिजेक्शन पर रोक लगा दी है और प्रशासन को तुरंत आवेदन प्रोसेस करने का आदेश दिया है।
क्यों रोका गया था बच्चे का एडमिशन
बच्चे को RTE एक्ट के तहत कक्षा 1 में एडमिशन मिलना था। नियम के मुताबिक स्कूल के 1 किमी के दायरे में रहने का सबूत देना होता है। बच्चे के पिता पिछले 12 साल से ऐरोली में किराए पर रह रहे थे और उन्होंने बैंक अकाउंट, पासपोर्ट और गैस कनेक्शन जैसे दस्तावेज दिए थे। लेकिन Navi Mumbai Municipal Corporation के शिक्षा विभाग ने रजिस्टर्ड लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट न होने की वजह से 28 मई और 10 जून को उनका आवेदन खारिज कर दिया था।
कोर्ट ने क्या कहा और क्या आदेश दिया
जस्टिस रियाज़ चागला और जस्टिस फरहान दुबाश ने कहा कि कोर्ट एडमिशन से इनकार करने के मामले में मूकदर्शक नहीं बना रह सकता। कोर्ट ने साफ किया कि प्राथमिक शिक्षा एक मौलिक अधिकार है और राज्य की जिम्मेदारी है कि बच्चा अपनी पढ़ाई पूरी करे। कोर्ट ने रिजेक्शन लेटर पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार व शिक्षा विभाग से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को होगी।
RTE एक्ट और शिक्षा का अधिकार
यह फैसला Right of Children to Free and Compulsory Education Act, 2009 और संविधान के अनुच्छेद 21A पर आधारित है। इसके तहत 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार मिलता है। बच्चे के वकील सिधेश्वर बिरदार ने कोर्ट को बताया कि इससे पहले कोल्हापुर बेंच ने भी एक ऐसे ही मामले में कहा था कि सिर्फ रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर न होने की वजह से किसी बच्चे का एडमिशन नहीं रोका जा सकता।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बच्चे का एडमिशन किस आधार पर रिजेक्ट किया गया था?
बच्चे का एडमिशन इसलिए रिजेक्ट किया गया था क्योंकि उसके पिता ने निवास प्रमाण के तौर पर रजिस्टर्ड लीव एंड लाइसेंस एग्रीमेंट (किरायानामा) जमा नहीं किया था।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिए हैं?
कोर्ट ने एडमिशन रिजेक्शन पर रोक लगा दी है और निर्देश दिया है कि बच्चे के आवेदन को तुरंत प्रोसेस किया जाए क्योंकि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है।