Maharashtra में FDA की मनमानी पर Bombay High Court सख्त, बिना चेतावनी रेस्टोरेंट बंद करने के आदेश पलटे
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले एक महीने में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा रेस्टोरेंट और डेयरी के लाइसेंस रद्द करने के कम से कम नौ फैसलों को पलट दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि सिर्फ टूटी टाइ
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले एक महीने में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) द्वारा रेस्टोरेंट और डेयरी के लाइसेंस रद्द करने के कम से कम नौ फैसलों को पलट दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि सिर्फ टूटी टाइल्स या एक-दो कीड़े मिलने पर बिना किसी चेतावनी के दुकान बंद नहीं की जा सकती। कोर्ट के मुताबिक, ऐसा कदम तभी उठाया जाना चाहिए जब जनता की सेहत को कोई गंभीर खतरा हो।
अदालत ने नवी मुंबई के एक चार-स्टार होटल Park Inn by Radisson के लाइसेंस निलंबन को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि होटल का हाइजीन स्कोर 95% था और सिर्फ दो कीड़े मिलने की वजह से लाइसेंस सस्पेंड करना सही नहीं है। इसी तरह छत्रपति संभाजीनगर में दूध विक्रेताओं और डेयरी वालों के खिलाफ FDA की कार्रवाई पर भी रोक लगा दी गई क्योंकि उन्हें सुधार का मौका नहीं दिया गया था।
कोर्ट ने FDA की इस कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन पहले गोली चला रहा है और सवाल बाद में पूछ रहा है। एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे ने कहा कि नियम लागू करते समय जमीनी हकीकत देखनी चाहिए और इलाज बीमारी से ज्यादा बुरा नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि कानून सबके लिए बराबर है और जो मानक प्राइवेट दुकानों के लिए हैं, वही सरकारी कैंटीन पर भी लागू होने चाहिए।
मामला तब और गरमा गया जब कोर्ट ने पाया कि मंत्रालय की कैंटीन और हाई कोर्ट की अपनी कैंटीन में भी साफ-सफाई की कमी थी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकारी कैंटीनों की भी जांच हो। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट की धारा 32 के तहत, लाइसेंस सस्पेंड करने से पहले कम से कम 14 दिन का ‘इम्प्रूवमेंट नोटिस’ देना जरूरी है। केवल बहुत गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की स्थिति में ही बिना नोटिस के कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन कोर्ट ने पाया कि FDA इस नियम का गलत इस्तेमाल कर रहा है।
दूसरी तरफ, FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने इस अभियान को सही ठहराया है। उनका कहना है कि सुरक्षित भोजन हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और बिना वैध FSSAI लाइसेंस के कोई भी संस्थान नहीं चलेगा। गवर्नमेंट प्लीडर नेहा भिडे ने भी कोर्ट में दलील दी कि स्वच्छता और फूड सेफ्टी के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। फिलहाल, कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पूरणिमा रेस्टोरेंट और मंत्रालय की कैंटीनों को सुधार का मौका दिया गया है और उनकी दोबारा जांच की जाएगी।