Maharashtra: विरार (पश्चिम) के रहने वाले दर्पण ठाकुर के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उनकी करीब 18,700 वर्ग फुट जमीन पर लगे रिजर्वेशन को खत्म कर दिया है। अब यह जमीन उनके विकास के लिए खाली हो ग
Maharashtra: विरार (पश्चिम) के रहने वाले दर्पण ठाकुर के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उनकी करीब 18,700 वर्ग फुट जमीन पर लगे रिजर्वेशन को खत्म कर दिया है। अब यह जमीन उनके विकास के लिए खाली हो गई है और राज्य सरकार को जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा करनी होगी।
जमीन का रिजर्वेशन क्यों हटा और क्या था मामला?
यह जमीन 9 फरवरी 2007 को एक डेवलपमेंट प्लान के तहत रिजर्व की गई थी। नियमों के मुताबिक, अगर सरकार 10 साल के अंदर रिजर्व जमीन का अधिग्रहण नहीं करती, तो मालिक नोटिस दे सकता है। दर्पण ठाकुर ने नोटिस दिया था, लेकिन वसई विरार सिटी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (VVMC) ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने नवंबर 2023 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने VVMC की कार्यप्रणाली पर क्या कहा?
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता ने VVMC के रवैये की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि मार्च 2025 में TDR (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) देने का प्रस्ताव सिर्फ एक दिखावा था। जजों ने टिप्पणी की कि अधिकारी बिना किसी ठोस वजह के नागरिकों को परेशान करने पर तुले हुए हैं। कोर्ट ने साफ किया कि MRTP एक्ट की धारा 127 के तहत रिजर्वेशन का खत्म होना एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके लिए अलग से कोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं होती।
अब आगे क्या होगा और नियम क्या कहते हैं?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया है कि वह इस फैसले के छह हफ्ते के भीतर सरकारी गजट में नोटिफिकेशन जारी करे। MRTP एक्ट के अनुसार, अगर नोटिस के 24 महीने बाद भी सरकार जमीन नहीं लेती, तो रिजर्वेशन अपने आप खत्म हो जाता है। अब दर्पण ठाकुर अपनी जमीन का इस्तेमाल आसपास की जमीन के उपयोग के हिसाब से कर सकेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MRTP एक्ट की धारा 127 क्या है?
इस नियम के तहत अगर सार्वजनिक उद्देश्य के लिए रिजर्व जमीन को 10 साल में नहीं लिया जाता, तो मालिक नोटिस दे सकता है। नोटिस के 24 महीने बाद भी कार्रवाई न होने पर रिजर्वेशन खत्म मान लिया जाता है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को क्या निर्देश दिए हैं?
कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया है कि वह 22 अप्रैल 2026 के फैसले के बाद छह हफ्ते के अंदर आधिकारिक गजट में नोटिफिकेशन प्रकाशित करे।