Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने फहीम अंसारी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने ऑटो-रिक्शा चलाने के लिए पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) की मांग की थी। कोर्ट ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राज्य सरकार
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने फहीम अंसारी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने ऑटो-रिक्शा चलाने के लिए पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) की मांग की थी। कोर्ट ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराया है। फहीम अंसारी को 2010 में 26/11 मुंबई आतंकी हमले के केस में बरी किया गया था, लेकिन अब वह कानूनी अड़चनों में फंसे हैं।
कोर्ट ने PCC देने से क्यों किया इनकार?
जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस रंजितसिन्हा भोंसले की बेंच ने इस मामले के तथ्यों को काफी अजीब बताया। महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट में एक गोपनीय रिपोर्ट पेश की और कहा कि अंसारी के प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध हो सकते हैं, इसलिए उनकी निगरानी जरूरी है। सरकारी वकील ने 2014 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अंसारी इन गाइडलाइंस के मुताबिक PCC पाने के योग्य नहीं हैं।
क्या है फहीम अंसारी का पिछला रिकॉर्ड?
फहीम अंसारी को 26/11 हमले के मामले में सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया था। हालांकि, वह उत्तर प्रदेश के रामपुर में CRPF कैंप हमले के केस में दोषी पाए गए थे, जिसमें उन्होंने 10 साल की सजा काटी और 2019 में जेल से बाहर आए। जेल से छूटने के बाद उन्होंने प्रिंटिंग प्रेस में काम किया, लेकिन ज्यादा कमाई के लिए उन्होंने जनवरी 2024 में ड्राइविंग लाइसेंस लिया और ऑटो चलाने की कोशिश की।
अब अंसारी के पास क्या विकल्प हैं?
कोर्ट ने साफ किया कि पुलिस वेरिफिकेशन या क्लीयरेंस सर्टिफिकेट की जरूरत न होने वाले किसी भी अन्य काम में अंसारी रोजगार ढूंढ सकते हैं। अंसारी की वकील पायोशी रॉय ने दलील दी थी कि PCC न देना उनके आजीविका के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और यह भेदभावपूर्ण है, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
फहीम अंसारी को PCC की जरूरत क्यों थी?
फहीम अंसारी ऑटो-रिक्शा चलाना चाहते थे। इसके लिए RTO से बैज और परमिट लेना जरूरी होता है, जिसके लिए पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) अनिवार्य दस्तावेज है।
कोर्ट ने किन आधारों पर याचिका खारिज की?
कोर्ट ने सुरक्षा के सवाल और राज्य सरकार द्वारा पेश की गई गोपनीय रिपोर्ट को आधार बनाया। सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंधों और निगरानी की जरूरत की बात कही थी।