Maharashtra: कॉमेडियन भारती सिंह और एक्टर शेखर सुमन के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। Bombay High Court ने उनके खिलाफ दर्ज एक पुरानी FIR को रद्द कर दिया है। यह पूरा मामला एक कॉमेडी शो के डायलॉग से जुड़ा था, जिसे लेकर काफी वि
Maharashtra: कॉमेडियन भारती सिंह और एक्टर शेखर सुमन के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। Bombay High Court ने उनके खिलाफ दर्ज एक पुरानी FIR को रद्द कर दिया है। यह पूरा मामला एक कॉमेडी शो के डायलॉग से जुड़ा था, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था। कोर्ट ने साफ कहा कि इस डायलॉग का मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
क्या था पूरा मामला और विवादित डायलॉग
यह मामला साल 2010 का है जब Sony Entertainment Television पर ‘Comedy Circus Ka Jadoo’ शो आता था। 4 सितंबर 2010 को प्रसारित एक एपिसोड में “या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!” डायलॉग बोला गया था। इस पर मोहम्मद रसाबी और रजा एकेडमी के प्रतिनिधि ने मुंबई के प्याधोनी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। कलाकारों ने इस FIR को हटवाने के लिए 2012 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा
जस्टिस अमित बोरकर की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ खाने-पीने की चीजों का इस्तेमाल करने से किसी धर्म का अपमान नहीं हो जाता। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कलाकारों के खिलाफ बिना सोचे-समझे आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कानून के मुताबिक, किसी को सजा देने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि काम जानबूझकर और गलत इरादे से किया गया था, जो इस मामले में नहीं मिला।
फैसले के मुख्य बिंदु
- कॉमेडी शो को पूरा देखना चाहिए, न कि सिर्फ कुछ शब्दों को चुनकर विवाद करना चाहिए।
- सिर्फ कुछ दर्शकों को बुरा लगना कानूनन अपराध नहीं है, जब तक कि गलत इरादा न हो।
- भारतीय दंड संहिता की धारा 295A के तहत आरोप लगाने के लिए ‘दुर्भावनापूर्ण इरादे’ का होना जरूरी है।
- इस मामले में जरूरी सरकारी मंजूरी (sanction) न मिलने की वजह से भी कानूनी प्रक्रिया कमजोर थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह विवाद किस टीवी शो और डायलॉग को लेकर था?
यह विवाद Sony TV के शो ‘Comedy Circus Ka Jadoo’ के एक डायलॉग “या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!” को लेकर था, जो 2010 में प्रसारित हुआ था।
Bombay High Court ने FIR क्यों रद्द की?
कोर्ट ने माना कि डायलॉग में कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा नहीं था और केवल खाने की चीजों का जिक्र करना किसी धर्म का अपमान नहीं माना जा सकता।