Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने रद्द किए तड़ीपार आदेश, पूछा- क्या नागरिकों को सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 से शुरुआती 2026 के बीच जारी किए गए कई तड़ीपार (externment) आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इसे बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन बताया। जस्टिस माधव जे. जामदार ने अपनी टिप्पणी म
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 से शुरुआती 2026 के बीच जारी किए गए कई तड़ीपार (externment) आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इसे बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन बताया। जस्टिस माधव जे. जामदार ने अपनी टिप्पणी में सवाल उठाया कि क्या सरकार विरोध करने वाले नागरिकों को अपना गुलाम बनाना चाहती है।
कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। कई लोगों को सिर्फ इसलिए तड़ीपार किया गया क्योंकि उन्होंने बिना अनुमति के प्रदर्शन किए थे या सरकार की नीतियों का विरोध किया था। जस्टिस जामदार ने कहा कि पुलिस एक्ट की धारा 56 के तहत तड़ीपार करने के लिए जो शर्तें जरूरी थीं, वे इन मामलों में मौजूद नहीं थीं। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ‘बाबरी मस्जिद नहीं गिराई जानी चाहिए थी’ जैसी राय रखना कोई देशद्रोह नहीं है और नागरिकों को अपनी बात रखने का पूरा हक है।
इस कार्रवाई का आम लोगों के जीवन पर बुरा असर पड़ा। तड़ीपार किए गए लोगों ने कोर्ट को बताया कि इस वजह से उन्होंने अपनी नौकरियां खो दीं और अपने बच्चों के जन्म तथा चुनावों जैसे महत्वपूर्ण मौकों पर घर से दूर रहे। उन्हें अपराधियों की तरह ट्रीट किया गया, जबकि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप मामूली थे।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य सरकारी वकील शिशिर हिरय ने याचिकाकर्ताओं का संबंध PFI से होने और शांति भंग करने का दावा किया, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इन आरोपों को गलत बताया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या ऐसी ही कार्रवाई अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी की गई या यह सब सिर्फ एक धर्म से जुड़े होने के कारण हुआ।
इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की आजादी और गरिमा के साथ जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत सुरक्षित है। पुलिस केवल मामूली धाराओं के आधार पर किसी व्यक्ति को उसके इलाके से बाहर नहीं निकाल सकती।