Maharashtra: सरकार के फैसले का विरोध करने पर नहीं हो सकती तड़ीपार, Bombay High Court ने पुलिस को याद दिलाई उनकी जिम्मेदारी
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि सरकार के फैसलों का विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। कोर्ट ने साफ किया कि केवल विरोध प्रदर्शन करने या सरकार के खिलाफ नारे लगाने के आधार पर किसी नागरिक क
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि सरकार के फैसलों का विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। कोर्ट ने साफ किया कि केवल विरोध प्रदर्शन करने या सरकार के खिलाफ नारे लगाने के आधार पर किसी नागरिक को तड़ीपार नहीं किया जा सकता। जस्टिस माधव जे. जामदार ने पुलिस को याद दिलाया कि वे जनता के सेवक हैं, न कि किसी राजनेता के निजी नौकर।
यह पूरा मामला राजनीतिक कार्यकर्ता सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी से जुड़ा है। मुंबई पुलिस के डीसीपी (ज़ोन 6- चेंबूर) ने 3 दिसंबर 2025 को उन्हें एक साल के लिए तड़ीपार करने का आदेश दिया था। इस आदेश को मार्च 2026 में डिविजनल कमिश्नर ने भी सही ठहराया था। चौधरी ने इस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके बाद कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया।
कोर्ट ने पाया कि चौधरी के खिलाफ 2019 से 2024 के बीच कई एफआईआर दर्ज थीं, लेकिन ये ज्यादातर सरकारी फैसलों, जैसे नागरिकता कानून में बदलाव और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के खिलाफ प्रदर्शनों से जुड़ी थीं। जस्टिस जामदार ने कहा कि नागरिकों को ‘भारतीय सरकार का गुलाम’ नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई ‘बीजेपी सरकार मुर्दाबाद’ या ‘अमित शाह मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाता है, तो उसे तड़ीपार क्यों किया जाए।
अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत अभिव्यक्ति की आजादी और सम्मान के साथ जीने का अधिकार सबको मिला है। पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि राजनीतिक जवाबदेही से बचने के लिए लोगों को दबाना। कोर्ट ने तड़ीपार करने की कार्रवाई को गलत बताया क्योंकि यह किसी व्यक्ति के देश में कहीं भी घूमने की आजादी को छीन लेता है।