Maharashtra: मुंबई के Andheri West इलाके की एक हाउसिंग सोसाइटी के लिए बड़ा झटका आया है। Bombay High Court ने उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसके तहत सोसाइटी को Deemed Conveyance दिया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि एक बार जब कि
Maharashtra: मुंबई के Andheri West इलाके की एक हाउसिंग सोसाइटी के लिए बड़ा झटका आया है। Bombay High Court ने उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसके तहत सोसाइटी को Deemed Conveyance दिया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि एक बार जब किसी मामले पर अंतिम फैसला हो जाता है, तो सक्षम अधिकारी उसी मुद्दे पर दोबारा आवेदन स्वीकार नहीं कर सकता।
कोर्ट ने Deemed Conveyance क्यों रद्द किया?
Justice Farhan Dubash ने अपने फैसले में बताया कि Deputy Registrar ने वह पावर इस्तेमाल की जो उन्हें Maharashtra Ownership of Flats Act (MOFA) के तहत नहीं दी गई है। Apeksha CHSL सोसाइटी ने पहले अगस्त 2016 में आवेदन किया था जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद सोसाइटी ने दोबारा आवेदन किया और मई 2017 में उन्हें Conveyance मिल गया, जिसे अब कोर्ट ने गलत माना है।
इस फैसले का आम लोगों और सोसायटियों पर क्या असर होगा?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) अथॉरिटी अपने ही फैसले की समीक्षा (Review) तब तक नहीं कर सकती जब तक कि कानून में ऐसा प्रावधान न हो। यह फैसला अन्य सोसायटियों के लिए भी एक मिसाल है कि अगर एक बार आवेदन खारिज हो गया है, तो बिना किसी ठोस कानूनी बदलाव के दोबारा वही आवेदन देना गलत है। इस मामले में B K Corporation ने याचिका दायर की थी, जिसकी पैरवी वकील Shishir Joshi ने की थी।
MOFA एक्ट और कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि दूसरा आवेदन ‘समय से पहले’ था और यह कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ था। Justice Sandeep V. Marne ने भी हाल ही में एक अलग मामले में इसी तरह की बात कही थी कि MOFA के तहत अधिकारी एक ही तरह के बार-बार आवेदन स्वीकार नहीं कर सकते।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Deemed Conveyance का यह फैसला किस सोसाइटी से जुड़ा है?
यह मामला Andheri West की Apeksha CHSL सोसाइटी और प्रमोटर B K Corporation के बीच का है, जिसमें कोर्ट ने सोसाइटी को मिले Conveyance को रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने Deputy Registrar के आदेश को क्यों गलत बताया?
कोर्ट के अनुसार Deputy Registrar के पास MOFA कानून के तहत अपने पुराने फैसले की समीक्षा करने का अधिकार नहीं था, इसलिए उन्होंने दोबारा आवेदन स्वीकार करके गलती की।