Finance: अगर आपने किसी बैंक या NBFC से लोन लिया है, तो यह खबर आपके काम की है। Bombay High Court ने फाइनेंस कंपनियों द्वारा अपनी मर्जी से Arbitrator (मध्यस्थ) नियुक्त करने के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कह
Finance: अगर आपने किसी बैंक या NBFC से लोन लिया है, तो यह खबर आपके काम की है। Bombay High Court ने फाइनेंस कंपनियों द्वारा अपनी मर्जी से Arbitrator (मध्यस्थ) नियुक्त करने के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि बैंक और NBFCs जिस तरह से एल्गोरिदम या संस्थाओं के जरिए अकेले ही मध्यस्थ चुन रहे हैं, वह पूरी तरह गलत और कानून के खिलाफ है।
बैंक और NBFCs क्या गलत कर रहे थे?
कोर्ट ने पाया कि कई फाइनेंस कंपनियां कानून से बचने के लिए चालाकी कर रही थीं। वे खुद ही Arbitrator चुन लेते थे और इसे सही दिखाने के लिए किसी संस्था या कंप्यूटर एल्गोरिदम का सहारा लेते थे। Justice Somasekhar Sundaresan ने इसे कानून को धोखा देने वाला तरीका बताया। कोर्ट के मुताबिक, ऐसा करने से विवाद सुलझाने की पूरी प्रक्रिया बदनाम होती है और आम ग्राहकों का भरोसा टूटता है।
Arbitrator नियुक्त करने के सही नियम क्या हैं?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनन Arbitrator नियुक्त करने के केवल दो ही तरीके हैं:
- दोनों पक्षों (बैंक और ग्राहक) की आपसी सहमति से नियुक्ति।
- Arbitration and Conciliation Act, 1996 के सेक्शन 11 के तहत कोर्ट द्वारा की गई नियुक्ति।
कोर्ट ने कहा कि सेक्शन 12(5) के तहत मध्यस्थ का निष्पक्ष होना जरूरी है, लेकिन अकेले बैंक द्वारा नियुक्त व्यक्ति निष्पक्ष नहीं हो सकता।
IIFL Finance पर गिरी गाज और कोर्ट की चेतावनी
इस मामले में IIFL Finance Limited की काफी आलोचना हुई। कोर्ट ने पाया कि कंपनी ने एल्गोरिदम के जरिए नियुक्तियों को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश की। अब इस फैसले को IIFL Finance के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिट कमेटी के सामने रखा जाएगा ताकि वे नियमों का पालन करें। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जब ग्राहक इन नियुक्तियों को चुनौती देते हैं, तो कंपनियां अक्सर केस वापस ले लेती हैं ताकि न्यायिक जांच से बचा जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या बैंक अकेले Arbitrator चुन सकता है?
नहीं, Bombay High Court के अनुसार बैंक या NBFC अकेले Arbitrator नियुक्त नहीं कर सकते। इसके लिए या तो दोनों पक्षों की सहमति होनी चाहिए या फिर कोर्ट द्वारा नियुक्ति की जानी चाहिए।
इस फैसले का आम कर्जदारों पर क्या असर होगा?
अब कर्जदार उन Arbitration फैसलों को चुनौती दे सकते हैं जहां बैंक ने अपनी मर्जी से मध्यस्थ चुना था। इससे ग्राहकों को निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिलेगा।