Goa: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि गोवा भारत का अभिन्न अंग है और यहाँ भारत का संविधान लागू होता है। कोर्ट ने कहा कि भारत की किसी भी सिविल कोर्ट से मिले आदेशों को विदेशी फैसला नहीं माना जा सकता। यह फ
Goa: बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि गोवा भारत का अभिन्न अंग है और यहाँ भारत का संविधान लागू होता है। कोर्ट ने कहा कि भारत की किसी भी सिविल कोर्ट से मिले आदेशों को विदेशी फैसला नहीं माना जा सकता। यह फैसला उन मामलों में बड़ा बदलाव लाएगा जहाँ पुर्तगाली कानूनों का हवाला दिया जाता था।
क्या है पूरा मामला और कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने पाया कि गोवा के मैरिज रजिस्ट्रार (Registrars of Marriage) भारत की अन्य सिविल कोर्ट के आदेशों को मानने से इनकार कर रहे थे। वे 1867 के पुर्तगाली सिविल कोड (Portuguese Civil Code) का सहारा लेकर इन आदेशों को ‘विदेशी अदालतों’ का फैसला बता रहे थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे गलत ठहराते हुए कहा कि गोवा भारत का हिस्सा है, इसलिए यहाँ किसी भी भारतीय कोर्ट के आदेश मान्य होंगे।
मैरिज रजिस्ट्रार पर अब क्या असर होगा?
इस फैसले के बाद अब गोवा के मैरिज रजिस्ट्रार भारत के किसी भी राज्य की सिविल कोर्ट से आए आदेशों को पहचानने और उन पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य हैं। वे अब पुर्तगाली सिविल कोड (PCC) का उपयोग करके भारतीय अदालतों के फैसलों को खारिज नहीं कर सकते। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो कानूनी प्रक्रियाओं के लिए दूसरे राज्यों की अदालतों पर निर्भर थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुर्तगाली सिविल कोड के बारे में क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि पुर्तगाली सिविल कोड 1867 के प्रावधानों का इस्तेमाल करके भारतीय सिविल कोर्ट के आदेशों को ‘विदेशी फैसला’ नहीं माना जा सकता क्योंकि गोवा भारत का हिस्सा है।
इस फैसले का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अब गोवा के मैरिज रजिस्ट्रार को भारत की किसी भी सिविल कोर्ट के आदेश को मानना होगा, जिससे कानूनी कागजी कार्रवाई और विवाह संबंधी विवादों का निपटारा आसान होगा।