Maharashtra : बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक जनहित याचिका (PIL) पर जवाब देने का आदेश दिया है। यह याचिका SSPE नाम की एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए आर्थिक सहायता दिलाने की मांग को लेकर दायर की गई है। यह
Maharashtra : बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक जनहित याचिका (PIL) पर जवाब देने का आदेश दिया है। यह याचिका SSPE नाम की एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए आर्थिक सहायता दिलाने की मांग को लेकर दायर की गई है। यह बीमारी खसरे के वायरस में बदलाव आने की वजह से होती है और बच्चों के दिमाग पर बुरा असर डालती है।
क्या है SSPE बीमारी और क्यों है इलाज मुश्किल
Subacute Sclerosing Panencephalitis (SSPE) एक ऐसी गंभीर बीमारी है जो बच्चों और युवाओं के नर्वस सिस्टम को खराब कर देती है। इसमें मरीज की आंखों की रोशनी जाना, मांसपेशियों में खिंचाव, दौरे पड़ना और याददाश्त खोना जैसे लक्षण दिखते हैं। फिलहाल इस बीमारी का कोई पक्का इलाज नहीं है और डॉक्टर सिर्फ लक्षणों को कम करने की कोशिश करते हैं, जिससे मरीज धीरे-धीरे कोमा में चला जाता है और मौत हो जाती है।
याचिका में क्या मांग की गई और क्या है परिवारों का दर्द
पनवेल के एक कारोबारी महादु बेलकर ने यह याचिका दायर की है, जिनके 16 साल के बेटे तनिष की इस बीमारी के कारण मौत हो गई। याचिका में सरकार से इन मांगों पर जोर दिया गया है:
- बीमारी के इलाज और देखभाल के लिए एक ठोस सरकारी पॉलिसी बनाई जाए।
- इलाज खोजने के लिए रिसर्च प्रोग्राम शुरू किए जाएं।
- प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद दी जाए क्योंकि इलाज का खर्च बहुत ज्यादा है।
जानकारी के मुताबिक, एक मरीज की देखभाल पर महीने का 55,000 से 60,000 रुपये खर्च होता है और इंश्योरेंस कंपनियां भी इसका कवर नहीं देती हैं।
केंद्र और राज्य सरकार का अब तक क्या रुख रहा है
महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि उनके पास इस बीमारी के लिए कोई अलग स्कीम नहीं है। राज्य सरकार ने जुलाई 2025 में केंद्र से अपील की थी कि SSPE को ‘नेशनल पॉलिसी फॉर रेयर डिजीज’ (NPRD) में शामिल किया जाए। इस पॉलिसी के तहत मरीजों को 50 लाख रुपये की एकमुश्त मदद मिलती है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि यह बीमारी लाइलाज है, इसलिए इसे इस लिस्ट में शामिल नहीं किया जा सकता। अब हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है।