Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस के काम करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव किया है। अब अगर पुलिस किसी व्यक्ति को शुरुआती पूछताछ के लिए बुलाती है, तो उसे शिकायत की एक कॉपी देना जरूरी होगा। यह नियम FIR दर्ज होने से पहले
Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस के काम करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव किया है। अब अगर पुलिस किसी व्यक्ति को शुरुआती पूछताछ के लिए बुलाती है, तो उसे शिकायत की एक कॉपी देना जरूरी होगा। यह नियम FIR दर्ज होने से पहले और बाद, दोनों स्थितियों में लागू होगा ताकि व्यक्ति को पता रहे कि उस पर क्या आरोप लगे हैं।
पुलिस के लिए क्या हैं नए नियम
जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस हितेन वेनेगावकर की बेंच ने 15 अप्रैल 2026 को यह निर्देश जारी किया। कोर्ट ने साफ कहा है कि नोटिस के साथ शिकायत की कॉपी देना अनिवार्य है। अगर किसी वजह से पूरी कॉपी देना मुमकिन न हो, तो पुलिस को एक अलग कागज पर आरोपों का साफ और संक्षिप्त विवरण (gist) देना होगा।
किन हालात में नहीं मिलेगी शिकायत की कॉपी
कोर्ट ने कुछ खास स्थितियों में इस नियम से छूट दी है। अगर शिकायत की कॉपी देने से जांच पर बुरा असर पड़ता है या शिकायतकर्ता और गवाहों की जान को खतरा हो सकता है, तो पुलिस कॉपी नहीं देगी। ऐसी स्थिति में पुलिस अधिकारी को इसके पीछे की ठोस वजह लिखित में रिकॉर्ड करनी होगी।
कोर्ट ने यह फैसला क्यों लिया
अदालत ने पाया कि कई मामलों में पुलिस बिना शिकायत की कॉपी दिए नोटिस भेज रही थी। कोर्ट ने इसे कानून के शासन के खिलाफ बताया और कहा कि यह व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। यह पूरा मामला Vibrant Construction Pvt Ltd के डायरेक्टर अजय अग्रवाल की याचिका पर आया था, जिन्होंने चारकोप पुलिस से शिकायत की कॉपी मांगी थी।