Maharashtra: पुणे के ILS Law College के एक दूसरे साल के छात्र को बॉम्बे हाई कोर्ट ने परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से मना कर दिया है। छात्र की अटेंडेंस सिर्फ 3% थी, जिसके लिए उसने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ इंटर्न
Maharashtra: पुणे के ILS Law College के एक दूसरे साल के छात्र को बॉम्बे हाई कोर्ट ने परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से मना कर दिया है। छात्र की अटेंडेंस सिर्फ 3% थी, जिसके लिए उसने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ इंटर्नशिप करने का कारण बताया था। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए छात्र को कोई राहत नहीं दी।
अटेंडेंस को लेकर क्या हैं नियम
मुंबई यूनिवर्सिटी के ऑर्डिनेंस 6086 और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों के मुताबिक, कानून के छात्रों के लिए लेक्चर और प्रैक्टिकल में कम से कम 75% अटेंडेंस होना जरूरी है। UGC ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में साफ किया कि यूनिवर्सिटीज के लिए 75% अटेंडेंस का पैमाना तय करना जरूरी है।
कोर्ट ने छात्र को क्या कहा
जस्टिस रियाज चागला और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने छात्र की हालत पर हैरानी जताते हुए कहा कि आपकी अटेंडेंस सिर्फ 3% है। जब छात्र के वकील ने दलील दी कि कॉलेज ने जरूरी घंटों से कम लेक्चर लिए हैं, तो कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा कि अगर कॉलेज की गलती है, तो क्या आपकी गलती नहीं हुई।
कॉलेज का क्या तर्क था
- कॉलेज के वकील ने बताया कि इंटर्नशिप तीसरे से पांचवें साल के छात्रों के लिए अनिवार्य होती है।
- चूंकि यह छात्र दूसरे साल में था, इसलिए इंटर्नशिप को कम अटेंडेंस का वैध कारण नहीं माना जा सकता।
- छात्र ने दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए समानता के अधिकार की बात कही थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।