Maharashtra: पुणे के ILS Law College के उन छात्रों के लिए अच्छी खबर है जिन्हें अटेंडेंस कम होने की वजह से परीक्षा से रोका गया था। Bombay High Court ने सोमवार को इन छात्रों को चल रही सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने की इजाजत
Maharashtra: पुणे के ILS Law College के उन छात्रों के लिए अच्छी खबर है जिन्हें अटेंडेंस कम होने की वजह से परीक्षा से रोका गया था। Bombay High Court ने सोमवार को इन छात्रों को चल रही सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि इन छात्रों के नतीजे उनकी याचिकाओं पर आने वाले अंतिम फैसले के आधार पर तय होंगे।
अटेंडेंस को लेकर क्या है पूरा विवाद
छात्रों का आरोप था कि कॉलेज ने अटेंडेंस की कट-ऑफ तारीख 14 मार्च मान ली थी, जबकि सेमेस्टर आधिकारिक तौर पर 30 अप्रैल को खत्म हुआ था। याचिकाकर्ताओं की अटेंडेंस 50 से 54 प्रतिशत के बीच थी। छात्रों के वकीलों ने दलील दी कि कॉलेज ने जरूरी लेक्चर भी पूरे नहीं कराए थे, इसलिए उन्हें यूनिवर्सिटी के नियमों के तहत छूट मिलनी चाहिए।
कोर्ट ने किन नियमों और फैसलों का जिक्र किया
सुनवाई के दौरान जस्टिस आर.आई. छागला और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। यूनिवर्सिटी के नियम के मुताबिक 75% अटेंडेंस जरूरी है, जिसमें विशेष मामलों में 20% की छूट मिल सकती है। वहीं, Bar Council of India (BCI) के नियम 70% अटेंडेंस की बात करते हैं। कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के ‘सुशांत रोहिल्ला जजमेंट’ का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि सिर्फ अटेंडेंस की कमी की वजह से किसी छात्र को परीक्षा या पढ़ाई से नहीं रोका जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा और अगली तारीख क्या है
कोर्ट ने Savitribai Phule Pune University और ILS Law College को इस मामले में अपना जवाब 9 जून तक दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस पूरी याचिका पर आगे की सुनवाई 22 जून को होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि छात्र इस अंतरिम आदेश के आधार पर किसी भी तरह के स्थायी अधिकार का दावा नहीं कर सकते।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कोर्ट ने छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति किन शर्तों पर दी है?
कोर्ट ने छात्रों को अंतरिम राहत दी है, लेकिन यह साफ किया है कि उनके परीक्षा परिणाम उनकी याचिकाओं पर आने वाले अंतिम फैसले के अधीन होंगे।
यूनिवर्सिटी और BCI के अटेंडेंस नियमों में क्या अंतर है?
पुणे यूनिवर्सिटी के नियम के अनुसार न्यूनतम 75% अटेंडेंस चाहिए (20% छूट के प्रावधान के साथ), जबकि Bar Council of India (BCI) के नियम वकील के रूप में नामांकन के लिए 70% अटेंडेंस अनिवार्य मानते हैं।