Maharashtra: मुंबई के दादर में साल 2016 में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के ऐतिहासिक बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस को आधी रात में गिराए जाने के मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उस समय पुलिस द्वारा कार्रवाई
Maharashtra: मुंबई के दादर में साल 2016 में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के ऐतिहासिक बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस को आधी रात में गिराए जाने के मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उस समय पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर गहरा सदमा व्यक्त किया है। जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने इस मामले में मुंबई पुलिस कमिश्नर और BMC कमिश्नर से व्यक्तिगत हलफनामा पेश करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि आखिर आधी रात को यह तोड़फोड़ कैसे संभव हुई और पुलिस ने इसे रोकने की कोशिश क्यों नहीं की।
कोर्ट ने पुलिस और BMC की भूमिका पर क्या सवाल उठाए?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी सरकारी संस्था या BMC द्वारा रात 12 बजे से सुबह 7 बजे के बीच तोड़फोड़ की कार्रवाई करना लगभग नामुमकिन और बहुत ही अजीब बात है। कोर्ट ने एक पुलिस अधिकारी के उस हलफनामे को भी खारिज कर दिया जिसमें पुलिस की निष्क्रियता के आरोपों को निराधार बताया गया था। पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया गया है कि वे छह हफ्ते के भीतर यह जानकारी दें कि उस रात भोईवाड़ा थाने में कौन से अधिकारी तैनात थे। साथ ही BMC कमिश्नर से पूछा गया है कि क्या इस तोड़फोड़ के लिए कोई कानूनी अनुमति ली गई थी या यह कोई विशेष मामला था।
क्या है बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस का पूरा विवाद?
यह ऐतिहासिक प्रिंटिंग प्रेस दादर इलाके में स्थित था, जिसकी जमीन डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने 1930 में खरीदी थी और 1945 में यहां प्रेस की स्थापना की थी। 25 जून 2016 की तड़के इसे अचानक ढहा दिया गया था। प्रकाश अंबेडकर और उनके भाई आनंद अंबेडकर का आरोप है कि जब तोड़फोड़ शुरू हुई तो उन्होंने पुलिस से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। याचिका में कहा गया है कि ट्रस्टियों के आंतरिक विवाद और एक गलत स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर BMC ने नोटिस जारी किया था, जिसके बाद 400 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने इसे गिरा दिया था।
अगली सुनवाई और कोर्ट के निर्देश
हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 15 जून को अगली सुनवाई तय की है। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से उन सभी अधिकारियों के नाम मांगे हैं जो घटना के समय ड्यूटी पर थे। कोर्ट इस बात से हैरान है कि इतनी बड़ी ऐतिहासिक इमारत को रात के अंधेरे में गिरा दिया गया और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। अब पुलिस और BMC दोनों प्रमुखों को निजी तौर पर जवाब दाखिल करना होगा कि उनके विभाग से कहां चूक हुई और किसके आदेश पर यह सब हुआ।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बुद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस को कब गिराया गया था?
इस ऐतिहासिक प्रेस को 25 जून 2016 की सुबह करीब 12 बजे से 7 बजे के बीच मुंबई के दादर में गिराया गया था।
हाई कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से क्या जानकारी मांगी है?
कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से उन सभी पुलिस अधिकारियों के नाम और जानकारी मांगी है जो घटना वाली रात भोईवाड़ा थाने में ड्यूटी पर तैनात थे।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
बॉम्बे हाई कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 15 जून को करेगा, तब तक अधिकारियों को अपना जवाब देना होगा।