Navi Mumbai के रेस्टोरेंट का लाइसेंस बहाल न करने पर HC नाराज, FDA को लगाई फटकार

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने नवी मुंबई के एक बार और रेस्टोरेंट का लाइसेंस सस्पेंड करने के आदेश को वापस न लेने पर FDA को

Maharashtra: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने नवी मुंबई के एक बार और रेस्टोरेंट का लाइसेंस सस्पेंड करने के आदेश को वापस न लेने पर FDA को फटकारा है, जबकि दोबारा जांच में रेस्टोरेंट 100 प्रतिशत नियमों का पालन करता पाया गया था।

यह पूरा मामला बेलापुर स्थित Hotel Pawan Bar and Restaurant से जुड़ा है। FDA ने 29 जून को रेस्टोरेंट की जांच की थी, जिसमें इसे 63 प्रतिशत कंप्लायंट पाया गया और अगले ही दिन 30 जून को लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया। इसके बाद 14 जुलाई को दोबारा जांच हुई, जिसमें रेस्टोरेंट ने सभी कमियों को दूर कर लिया था और वह 100 प्रतिशत नियमों पर खरा उतरा। इसके बावजूद FDA ने सस्पेंशन ऑर्डर को रद्द नहीं किया, जिस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है।

एक्टिंग चीफ जस्टिस Ravindra Ghuge और जस्टिस Gautam Ankhad की बेंच ने FDA से पूछा कि रेस्टोरेंट मालिक को हर दिन होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह FDA पर जुर्माना लगा सकता है ताकि पीड़ित रेस्टोरेंट मालिक को हर्जाना दिया जा सके।

हाई कोर्ट ने पिछले कुछ समय में FDA के ‘चुनिंदा एक्शन’ पर कई बार सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को जमीनी हकीकत समझनी चाहिए और छोटे मुद्दों जैसे टूटी टाइल्स या एक-दो कीड़ों के मिलने पर सीधे लाइसेंस बंद नहीं करना चाहिए, जब तक कि वहां स्वास्थ्य का कोई गंभीर खतरा न हो।

हाल के दिनों में कोर्ट ने कई अन्य मामलों में भी राहत दी है। जुलाई के अंत में Park Inn by Radisson होटल का लाइसेंस बहाल किया गया क्योंकि वहां केवल दो कीड़े मिले थे और होटल 95 प्रतिशत नियमों का पालन कर रहा था। इसी तरह Fort स्थित Poornima Restaurant के मामले में भी FDA को सस्पेंशन को सुधार नोटिस में बदलने के लिए कहा गया।

इतना ही नहीं, कोर्ट ने 1 अगस्त को FDA कमिश्नर को निर्देश दिया कि राज्य सचिवालय और विधान भवन के कैंटीन की रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। कोर्ट ने पाया कि सरकारी कैंटीन की जांच और निजी रेस्टोरेंट की जांच के तरीके में बहुत बड़ा अंतर है।