Maharashtra: मुंबई के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में कर्मचारियों की भारी कमी है, जिससे सड़क हादसों के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में देरी हो रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को सख्त निर्देश दिए है
Maharashtra: मुंबई के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में कर्मचारियों की भारी कमी है, जिससे सड़क हादसों के पीड़ितों को मुआवजा मिलने में देरी हो रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द जरूरी सपोर्ट स्टाफ की भर्ती करे। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना स्टाफ के कोर्ट का काम ठीक से नहीं चल सकता और इससे आम लोगों को न्याय मिलने में दिक्कत आ रही है।
स्टाफ की कमी से कैसे प्रभावित हो रहे हैं लोग?
कोर्ट ने पाया कि MACT में अकाउंट ऑफिसर, असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट, बेलिफ और टाइपिस्ट जैसे जरूरी पदों पर भर्तियां नहीं हुई हैं। इस वजह से ट्रिब्यूनल की कार्यक्षमता गिर गई है। हालात यह हैं कि स्टेनोग्राफर्स की कमी के कारण जजों को खुद गवाहों के बयान हाथ से लिखने पड़ रहे हैं, जिसमें बहुत समय बर्बाद होता है। इससे केसों का निपटारा धीमा हो गया है और पीड़ितों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
कितने केस पेंडिंग हैं और क्या है मौजूदा स्थिति?
आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में ट्रिब्यूनल के सामने करीब 86,000 याचिकाएं लंबित हैं, जबकि बॉम्बे हाई कोर्ट में 18,000 अपीलें पेंडिंग हैं। मुंबई MACT में 124 गैर-न्यायिक पदों में से 50 पद खाली थे, जिसकी वजह से वहां 7,500 से ज्यादा केस रुके हुए थे। यह ट्रिब्यूनल 2019 से अपनी पूरी क्षमता के केवल 60 प्रतिशत पर काम कर रहा है। जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे ने कहा कि सपोर्ट स्टाफ किसी भी कोर्ट की रीढ़ की हड्डी होता है।
भर्ती में देरी के क्या कारण रहे?
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2024 में आम चुनावों के कारण मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू था, जिससे भर्ती प्रक्रिया में देरी हुई। इसके अलावा, MACT का प्रशासन राज्य सरकार के पास होता है, जिससे स्टाफ के तबादले और रोटेशन में दिक्कत आती है। हर साल होने वाली रिटायरमेंट ने भी कर्मचारियों की कमी को बढ़ाया है। कोर्ट ने जोर दिया कि जब तक बुनियादी ढांचा और स्टाफ नहीं होगा, तब तक सड़क हादसे के पीड़ितों को तेजी से न्याय दिलाने का सपना पूरा नहीं होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MACT में किन पदों पर कर्मचारियों की कमी है?
मुंबई MACT में मुख्य रूप से अकाउंट ऑफिसर, असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट, बेलिफ और टाइपिस्ट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भर्तियां खाली हैं।
स्टाफ की कमी का केसों पर क्या असर पड़ा है?
स्टाफ न होने से महाराष्ट्र में लगभग 86,000 याचिकाएं लंबित हैं और जजों को खुद सबूत रिकॉर्ड करने पड़ रहे हैं, जिससे न्याय मिलने में देरी हो रही है।