Maharashtra : बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक 17 साल की नाबालिग रेप सर्वाइवर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे 27 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने इस फैसले में लड़की के प्रजनन स्वायत्तता (Reproductive Aut
Maharashtra : बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक 17 साल की नाबालिग रेप सर्वाइवर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे 27 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने इस फैसले में लड़की के प्रजनन स्वायत्तता (Reproductive Autonomy) के अधिकार को बरकरार रखा है। यह मामला तब सामने आया जब नाबालिग की प्रेग्नेंसी MTP एक्ट की 24 हफ्ते की कानूनी सीमा को पार कर गई थी।
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया और क्यों
जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि एक रेप सर्वाइवर के तौर पर नाबालिग इस प्रेग्नेंसी को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। अदालत ने माना कि अपनी मर्जी से प्रजनन संबंधी निर्णय लेना भारत के संविधान द्वारा दिया गया एक मौलिक अधिकार है। इसी आधार पर कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन की अनुमति दी।
JJ Hospital मेडिकल बोर्ड की क्या राय थी
इस मामले में JJ Hospital के मेडिकल बोर्ड ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट पेश की थी। बोर्ड की मुख्य बातें इस प्रकार थीं:
- भ्रूण (Fetus) में कोई बड़ी शारीरिक खराबी नहीं पाई गई।
- मां के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को कोई गंभीर खतरा नहीं था।
- मेडिकल आधार पर इस समय गर्भपात के लिए कोई ठोस कारण नहीं मिला।
हालांकि, हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की राय को जानने के बाद भी पीड़िता की मानसिक स्थिति और उसके अधिकारों को प्राथमिकता दी और गर्भपात की अनुमति दे दी।
MTP एक्ट और कानूनी सीमा क्या है
Medical Termination of Pregnancy (MTP) एक्ट के तहत सामान्य तौर पर 24 हफ्ते तक ही गर्भपात की अनुमति होती है। लेकिन विशेष मामलों में, जैसे कि रेप सर्वाइवर या गंभीर स्वास्थ्य जोखिम होने पर, अदालतें मानवीय आधार और मौलिक अधिकारों को देखते हुए इस सीमा के बाद भी इजाजत दे सकती हैं।