Maharashtra: मुंबई नगर निगम (BMC) ने अपने इंजीनियरों के तबादलों में पारदर्शिता लाने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह कदम तब उठाया गया जब भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद 120 से ज्यादा इंजीनियरों के ट्रांसफर रद्द कर दि
Maharashtra: मुंबई नगर निगम (BMC) ने अपने इंजीनियरों के तबादलों में पारदर्शिता लाने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह कदम तब उठाया गया जब भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद 120 से ज्यादा इंजीनियरों के ट्रांसफर रद्द कर दिए गए। अब निगम प्रशासन चाहता है कि तबादलों की प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी हो ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
ट्रांसफर प्रक्रिया में क्या बदलाव आएंगे और कौन करेगा निगरानी
BMC प्रशासन ने बताया है कि इस नई कमेटी की कमान डायरेक्टर (इंजीनियरिंग एंड सर्विसेज) संभालेंगे। भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अब तबादलों की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए एक खास सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है, जो राज्य सरकार के ट्रांसपोर्ट और पशुपालन विभाग के सिस्टम की तरह काम करेगा। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और किसी भी अधिकारी का व्यक्तिगत प्रभाव नहीं रहेगा।
इस पूरे विवाद की शुरुआत और अब तक क्या हुआ
- अक्टूबर 2025 में तबादलों के आदेश जारी हुए थे, जिन्हें तत्कालीन कमिश्नर भूषण गग्रानी ने रोक दिया था।
- RTI एक्टिविस्ट अनिल गलगली ने अक्टूबर 2025 में ही इस कथित ट्रांसफर घोटाले की शिकायत की थी।
- मार्च 2026 में मेयर रितु तावडे ने म्युनिसिपल मजदूर यूनियन के पत्र के बाद इस मुद्दे पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
- 17 और 18 अप्रैल 2026 को 120 से अधिक इंजीनियरों के ट्रांसफर आधिकारिक तौर पर रद्द किए गए।
विपक्ष और एक्टिविस्ट्स की इस पर क्या राय है
बीजेपी के सिटी हेड अमित सतम ने तबादले रद्द करने के फैसले को सही बताया है। उनका कहना है कि इससे यह संदेश गया है कि BMC में अब निजी हितों के लिए ट्रांसफर नहीं होंगे। वहीं, RTI एक्टिविस्ट अनिल गलगली ने मांग की है कि BMC के अंदर चल रहे ‘ट्रांसफर मार्केट’ को पूरी तरह खत्म किया जाए और भविष्य के तबादलों के लिए एक स्वतंत्र कमेटी बनाई जाए ताकि जवाबदेही तय हो सके।