Bihar: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन (SIR) को सही ठहराया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को आदेश दिया है कि जिन लोगों को संदिग्ध मानकर वोटर लिस्ट से हटाया गया है, उनकी पूरी लिस्ट 4 हफ्ते के अंदर गृ
Bihar: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल रिवीजन (SIR) को सही ठहराया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को आदेश दिया है कि जिन लोगों को संदिग्ध मानकर वोटर लिस्ट से हटाया गया है, उनकी पूरी लिस्ट 4 हफ्ते के अंदर गृह मंत्रालय (MHA) को भेजी जाए। यह फैसला 27 मई 2026 को सुनाया गया।
चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस सूर्या कांत की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने साफ किया कि चुनाव आयोग के पास वोटर लिस्ट को अपडेट करने और जांच करने का अधिकार है ताकि चुनाव निष्पक्ष हों। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग सिर्फ शुरुआती जांच कर सकता है, लेकिन कोई व्यक्ति भारत का नागरिक है या नहीं, इसका अंतिम फैसला सिर्फ गृह मंत्रालय ही ले सकता है।
आम जनता और वोटरों पर क्या होगा असर?
इस फैसले के बाद अब चुनाव आयोग उन सभी संदिग्ध नामों की लिस्ट गृह मंत्रालय को सौंपेगा। अगर गृह मंत्रालय की जांच में कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक पाया जाता है, तो उसका नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि चुनाव आयोग हमेशा वोटरों के साथ खड़ा है।
विपक्ष के दावों को कोर्ट ने क्यों नकारा?
विपक्ष ने दलील दी थी कि यह प्रक्रिया एक तरह का ‘बैकडोर NRC’ है और यह असंवैधानिक है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज कर दिया। वकील अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि कोर्ट ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी प्रक्रिया पर भरोसा जताया है और सभी आरोपों को गलत माना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों का नाम वापस कैसे आएगा?
चुनाव आयोग संदिग्ध लोगों की लिस्ट गृह मंत्रालय को भेजेगा। गृह मंत्रालय द्वारा नागरिकता की जांच के बाद, यदि व्यक्ति भारतीय नागरिक पाया जाता है, तो उसका नाम फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को कितना समय दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को संदिग्ध नागरिकों की सूची गृह मंत्रालय (MHA) को भेजने के लिए 4 हफ्ते का समय दिया है।