Bihar: बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए अब जनगणना के काम के दौरान हाजिरी लगाना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जो शिक्षक फील्ड में जनगणना की ड्यूटी पर तैनात हैं, उन्हें अपनी लोकेशन से फोट
Bihar: बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए अब जनगणना के काम के दौरान हाजिरी लगाना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जो शिक्षक फील्ड में जनगणना की ड्यूटी पर तैनात हैं, उन्हें अपनी लोकेशन से फोटो खींचकर अपलोड करनी होगी। अब मास्टर साहब ड्यूटी के दौरान बिना काम किए घर नहीं बैठ पाएंगे।
शिक्षकों को फोटो कैसे और कहां अपलोड करनी होगी?
शिक्षा विभाग के नए नियम के मुताबिक, जनगणना के लिए तय किए गए इलाके में शिक्षकों को अपनी फोटो लेनी होगी। इस फोटो को ई-शिक्षा कोश (e-Shiksha Kosh) पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसी फोटो के आधार पर उनकी हाजिरी मानी जाएगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं ताकि फील्ड में शिक्षकों की मौजूदगी सुनिश्चित की जा सके।
ऑनलाइन हाजिरी में फर्जीवाड़े पर क्या होगी कार्रवाई?
विभाग ने पहले भी पाया है कि कई शिक्षक घर बैठे ‘ऑन-ड्यूटी’ का विकल्प चुनकर फर्जी हाजिरी लगा रहे थे। अप्रैल 2026 की एक जांच में 4,000 से ज्यादा शिक्षक अपनी ड्यूटी लोकेशन से दूर पाए गए थे। इसके लिए सभी जिलों में ई-शिक्षा कोश सेल बनाया गया है। पुराने फोटो अपलोड करने या गलत जानकारी देने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। विभाग ने पहले भी करीब 13,000 अनुपस्थित शिक्षकों की सैलरी काटी है।
हाजिरी के लिए अब तक क्या-क्या नियम लागू हुए?
बिहार शिक्षा विभाग शिक्षकों की जवाबदेही तय करने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहा है। फरवरी 2024 में शिक्षकों को सुबह 8:45 तक स्कूल पहुँचने और 9:00 बजे तक ‘Note Cam App’ से फोटो भेजने का आदेश दिया गया था। जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को निर्देश है कि वे नियमित रूप से हाजिरी की निगरानी करें और गड़बड़ी मिलने पर स्पष्टीकरण मांगें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जनगणना ड्यूटी के दौरान शिक्षक हाजिरी कैसे लगाएंगे?
शिक्षकों को अपने निर्धारित जनगणना क्षेत्र में फोटो खींचकर ई-शिक्षा कोश पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
गलत हाजिरी लगाने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
फर्जी हाजिरी या पुराने फोटो अपलोड करने पर विभाग सख्त कार्रवाई करेगा, जैसा कि पहले भी कई शिक्षकों की सैलरी काटकर किया गया है।