Bihar: सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड के जोल्हनियां गांव में एक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है। यह दस्तावेज करीब 100 साल पुराना बताया जा रहा है। यह खोज भारत सरकार के ‘Gyan Bharat Mission’ के तहत हुई है। जिला
Bihar: सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड के जोल्हनियां गांव में एक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है। यह दस्तावेज करीब 100 साल पुराना बताया जा रहा है। यह खोज भारत सरकार के ‘Gyan Bharat Mission’ के तहत हुई है। जिला प्रशासन अब लोगों से अपील कर रहा है कि अगर उनके पास ऐसे कोई पुराने कागज या दस्तावेज हैं, तो वे उन्हें सामने लाएं।
Supaul में अब तक कितनी पांडुलिपियां मिलीं
सुपौल जिले में प्राचीन दस्तावेजों की खोज का काम तेजी से चल रहा है। अब तक इस जिले से कुल 103 पांडुलिपियां प्राप्त हो चुकी हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि पुराने समय के ज्ञान और इतिहास को सहेजकर रखा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां इसे पढ़ सकें।
क्या है Gyan Bharat Mission और इसका मकसद
Gyan Bharat Mission भारत सरकार के Ministry of Culture द्वारा चलाया जा रहा एक राष्ट्रीय अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर में मौजूद लाखों पुरानी पांडुलिपियों को ढूंढना, उन्हें सुरक्षित करना और डिजिटल रूप में सहेजना है। सरकार ने इसके लिए 2024 से 2031 तक 482.85 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इस मिशन के तहत AI और ब्लॉकचेन जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि इन दस्तावेजों को सही तरीके से मैनेज किया जा सके।
देश के अन्य हिस्सों में भी चल रहा है यह अभियान
यह अभियान सिर्फ सुपौल तक सीमित नहीं है। बिहार के ही जहानाबाद में Nav Nalanda Mahavihara की टीम ने सर्वे किया है। इसके अलावा UP के कानपुर और कर्नाटक के Kodagu में भी प्राचीन दस्तावेजों की खोज के लिए निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने इसके लिए ‘Pandulipi Mitras’ नाम से वॉलंटियर्स की टीम भी तैयार की है जो जमीनी स्तर पर लोगों की मदद करेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Gyan Bharat Mission क्या है?
यह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देश की पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों को खोजकर उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित करना है।
सुपौल में अब तक कितनी पांडुलिपियां मिली हैं?
सुपौल जिले में अब तक कुल 103 पांडुलिपियां प्राप्त हो चुकी हैं, जिसमें हाल ही में जोल्हनियां गांव से एक 100 साल पुरानी पांडुलिपि मिली है।