Bihar : सिवान जिले के भगवानपुर हाट ब्लॉक के एक किसान अरुण कुमार ने खेती में कमाल कर दिया है। उन्होंने अपने दो एकड़ के बगीचे में कश्मीर के सेब समेत 15 से ज्यादा विदेशी फलों की खेती की है। वैज्ञानिक तरीकों और लगातार प्रयोग
Bihar : सिवान जिले के भगवानपुर हाट ब्लॉक के एक किसान अरुण कुमार ने खेती में कमाल कर दिया है। उन्होंने अपने दो एकड़ के बगीचे में कश्मीर के सेब समेत 15 से ज्यादा विदेशी फलों की खेती की है। वैज्ञानिक तरीकों और लगातार प्रयोगों की मदद से उन्होंने उन फलों को उगाया जो आमतौर पर बिहार की जलवायु के अनुकूल नहीं माने जाते थे।
अरुण कुमार के बगीचे में कौन-कौन से फल हैं
अरुण कुमार ने अपने बगीचे में Harman-99 और Anna जैसी सेब की किस्मों को सफलतापूर्वक उगाया है। इसके अलावा यहाँ कई अन्य विदेशी फल भी मिल रहे हैं। फलों की लिस्ट नीचे दी गई है:
- ड्रैगन फ्रूट (पीला और गुलाबी)
- एवोकाडो और स्ट्रॉबेरी
- अंजीर और थाई एप्पल
- प्लम और रेड गूसबरी
- माल्टा, चेरी और स्टार फ्रूट
- नाशपाती की विभिन्न किस्में
बता दें कि उन्होंने करीब 25 साल पहले नाशपाती की खेती से इसकी शुरुआत की थी। उनके बेटे सत्यम देव ने Agriculture में M.Sc. किया है, जिससे खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल आसान हो गया।
सरकारी मदद और सब्सिडी की जानकारी
बिहार सरकार बागवानी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। जुलाई 2025 में बागवानी विभाग ने अमरूद, आंवला और नींबू जैसे फलों के लिए 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी शुरू की थी। वहीं, नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के तहत ड्रैगन फ्रूट की खेती पर 40% सब्सिडी का प्रावधान है। जून 2026 के इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट मिशन के तहत हाई-वैल्यू फसलों पर 75% तक की सब्सिडी मिलने की योजना है। किसान इन योजनाओं के लिए बिहार एग्रीकल्चर ऐप या आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सिवान के किसान ने सेब उगाने के लिए कौन सी तकनीक अपनाई
अरुण कुमार ने वैज्ञानिक तरीकों और लगातार नए प्रयोगों का सहारा लिया। उन्होंने अपनी खेती में आधुनिक बागवानी तकनीकों का इस्तेमाल किया ताकि बिहार की मिट्टी में विदेशी फल उग सकें।
बिहार में फल की खेती के लिए सरकार क्या मदद दे रही है
बिहार सरकार बागवानी फसलों पर सब्सिडी दे रही है। ड्रैगन फ्रूट पर 40% और कुछ अन्य योजनाओं के तहत 75% तक की सब्सिडी उपलब्ध है, जिसके लिए किसान एग्रीकल्चर ऐप के जरिए अप्लाई कर सकते हैं।